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प्रकृति से है संगीत और पर्यावरण का अस्तित्व

प्रकृति से है संगीत और पर्यावरण का अस्तित्व

संक्षेप:

Varanasi News - वाराणसी में ‘संगीत एवं पर्यावरण के अंतरसंबधीय आयाम’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। डॉ. विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि संगीत और पर्यावरण का एक-दूसरे पर गहरा प्रभाव है। डॉ. राजेश्वर आचार्य और डॉ. रमेश कुमार भाटिया ने भी इस विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दो लोगों को हरितिमा सम्मान से अलंकृत किया गया।

Jan 05, 2026 11:01 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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वाराणसी, मुख्य संवाददाता। संगीत और पर्यावरण दोनों का अस्तित्व प्रकृति से ही है। संगीत का पर्यावरण पर और पर्यावरण का संगीत पर विशिष्ट प्रभाव पड़ता है। कल तक हम दंत कथाओं और पौराणिक आख्यानों के माध्यम से इस सच को जानते-समझते थे। आज विज्ञान ने भी इसे प्रमाणित कर दिया है। ये बातें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. विश्वभूषण मिश्र ने कहीं। वह रविवार को बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में ‘संगीत एवं पर्यावरण के अंतरसंबधीय आयाम’ विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। ग्रीन इको मूवमेंट सोसायटी, भाव प्रभा पद्म संस्थान एवं अनुनाद इंडिया फाउंडेशन की ओर से हुई संगोष्ठी में डॉ.मिश्र ने कहा कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सर जगदीश चंद्र बसु ने वनस्पतियों के साथ-साथ धातु एवं पाषाण में भी चेतन तत्व होने को प्रमाणित किया था।

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काशी में प्रचलित ‘कंकर-कंकर में शंकर’ की उक्ति भी इसका समर्थन करती है। अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री से अलंकृत डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि संसार में हरितिमा का बहुत महत्व है। यह जगत पर अपना प्रभाव बिल्कुल वैसे ही छोड़ती है जैसे संगीत का प्रभाव सभी पर पड़ता है। मुख्य वक्ता डॉ.रमेश कुमार भाटिया ने कहा कि संगीत और पर्यावरण एक दूसरे के पूरक है। प्राणी जगत में संतुलित के लिए पर्यावरण और संगीत में तारतम्यता आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि डॉ. गीता सिंह, प्रो. शरदिंदु तिवारी एवं प्रो.केएन.मूर्ति ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर हुई सांस्कृतिक संध्या में बाल कलाकार परीक्षित त्रिपाठी ने तबला वादन, डॉ.शिवानी शुक्ला सुगम गायन किया। संयोजन अंकित सिंह, स्वागत त्रिपुरारी शंकर, संचालन डॉ.प्रीतेश आचार्य एवं धन्यवाद ज्ञापन पीयूष आचार्य ने किया। दो लोगों को दिया गया हरितिमा सम्मान संगोष्ठी में विचार सत्र से पूर्व काशी की दो विभूतियों को हरितिमा सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वालों में सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के संस्थापक सचिव डॉ.रत्नेश वर्मा एवं बीएचयू के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो.सदाशिव द्विवेदी शामिल रहे। कार्यक्रम में योगाचार्य विजय प्रकाश मिश्र, प्रमोद पाठक, डॉ.आरवी.शर्मा, सरोज भाटिया, डॉ.अंबर भाटिया की उपस्थिति रही।