पुलिया प्रसंग में परिचर्चा के बाद महिलाओं का सम्मान
Varanasi News - वाराणसी में बीएचयू के मुक्ताकाशी मंच ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘महिला-सृजन और स्वाभिमान’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की। प्रो.किंग्सन सिंह पटेल ने स्त्री केंद्रित आंदोलनों का उल्लेख किया। सुनीता शुक्ल ने महिलाओं को अपनी ताकत पहचानने और सपनों का पीछा करने की प्रेरणा दी। डॉ.शारदा सिंह ने महिलाओं के अधिकारों पर ध्यान देने की बात की।
वाराणसी, संवाददाता। बीएचयू के मुक्ताकाशी मंच पुलिया प्रसंग की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान सह परिचर्चा रविवार को हुई। परिचर्चा का विषय ‘महिला-सृजन और स्वाभिमान’ रहा। इस अवसर पर पुलिया प्रसंग के संस्थापक प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने उपस्थिति महिलाओं को सम्मानित किया गया।मुख्य वक्ता बीएचयू के हिंदी विभाग की प्रो.किंग्सन सिंह पटेल ने स्त्री केंद्रित के उन महत्वपूर्ण आंदोलनों का जिक्र किया जो पश्चिमी देशों में हुए थे। उन्होंने काम करने के घंटों में कमी, स्त्रियों को वोट देने के अधिकार को मुख्य रूप से संदर्भित किया। समाज में स्त्री को बाजार की शोभा के रूप में रूपांतरित किए जाने पर दुःख व्यक्त किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सुनीता शुक्ल ने कहा कि अब जरूरी है कि महिलाएं अपनी ताकत को पहचानें। अपने सपनों का पीछा करें। करुणा, समानता और उदारता की बातें बचपन से ही लड़कों बता दी जाएं तो संतुलित एवं प्रगतिशील समाज के विकास में जल्दी ही सफलता मिल सकती है। विशिष्ट वक्ता डॉ.शारदा सिंह ने कहा कि महिलाओं को अपने कर्त्तव्य पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें अपने अधिकार की पूरी जानकारी भी होनी चाहिए। शोधार्थी पूजा सिंह ने कहा कि संघर्ष के एक लंबे इतिहास से गुजरने के बाद आब भी स्त्री को अनेक भेदभाव से जूझना पड़ रहा है। स्वागत डॉ.विंध्याचल यादव, संचालन डॉ.उदय पाल एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने किया।
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