भरत के चरित्र से मानव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। भरत जैसा भाई यदि समाज में हो तो घर-घर में सुख और समृद्धि बरसे। आज भाई-भाई जमीन जायदाद के लिए न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। किसी भी भाई में त्याग की भावना नहीं है। भरत जैसा भाई भगवान राम के लिए अपनी मां को त्याग दिया। 14 वर्षों तक राजा भरत कुटिया में रहे।

Newswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - वाराणसी। भरत के चरित्र से मानव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। भरत जैसा भाई यदि समाज में हो तो घर-घर में सुख और समृद्धि बरसे। आचार्य संजय प्रभु दास ने कहा कि भरत राम के लिए अपनी मां को त्याग दिया। 14 वर्षों तक राजा भरत कुटिया में रहे।

भरत के चरित्र से मानव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। भरत जैसा भाई यदि समाज में हो तो घर-घर में सुख और समृद्धि बरसे। आज भाई-भाई जमीन जायदाद के लिए न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। किसी भी भाई में त्याग की भावना नहीं है। भरत जैसा भाई भगवान राम के लिए अपनी मां को त्याग दिया। 14 वर्षों तक राजा भरत कुटिया में रहे।

वाराणसी। भरत के चरित्र से मानव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। भरत जैसा भाई यदि समाज में हो तो घर-घर में सुख और समृद्धि बरसे। आज भाई-भाई जमीन जायदाद के लिए न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। किसी भी भाई में त्याग की भावना नहीं है। भरत जैसा भाई भगवान राम के लिए अपनी मां को त्याग दिया। 14 वर्षों तक राजा भरत कुटिया में रहे। ये बातें आचार्य संजय प्रभु दास ने कहीं। वह भगेलू साव स्मृति सेवा समिति एवं केसरवानी वैश्य नगर सभा की ओर से सारंग तालाब चौराहा स्थित ठाकुरजी की बगिया में आयोजित श्रीरामचरित मानस मास परायण कथा प्रेम यज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को प्रवचन कर रहे थे।

भरत का त्याग

उन्होंने कहा कि यदि भरत के मन में जरा सा भी दोष होता तो आज भरत नाम कोई भी पिता अपने पुत्र का नहीं रखता। ठीक उसी तरह जैसे इतिहास में मंथरा और कैकेई बस एक ही हुई है। यह भरत राम का प्रेम ही था कि आज तक हम भाइयों के रिश्ते की व्याख्या करने के लिए इन दोनों का नाम लेते हैं। जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक होने वाला था तब भरत अपने छोटे भाई शत्रुघ्न के साथ कैकेय राज्य में थे। उनकी अनुपस्थिति में कैकेयी ने मंथरा की चालों में आकर भगवान श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा नियुक्त करवा दिया। इसी दुःख में राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए थे। दशरथ के प्राण त्यागते ही कैकेय राज्य में तुरंत अयोध्या के दूत भेज कर भरत को बुलावा भेजा गया।

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भक्तों का योगदान

कथा के बाद भक्तों ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इनमें प्रदीप केशरी, गुलाब चंद केशरी, राजेश केशरी, मदनलाल केकेशरी, डॉ.एमके.गुप्ता, डॉ.अरुण गुप्ता, डॉ.एके.सिंह, अवधेश गुप्ता, डॉ.बीरेंद्र केसरवानी, ई.भोला प्रसाद, सीताराम केशरी, अजय चौधरी, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, विनोद केशरी, विनय केशरी, संतोष केशरी, विजय केशरी, सीए विजय प्रकाश, सीताराम केशरी शामिल रहे।

सामान्य प्रश्न

आचार्य संजय प्रभु दास ने भरत के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भरत के चरित्र से मानव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।
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