
अब साइबर और नॉन कांटैक्ट वारफेयर का दौर : डॉ. वीके सारस्वत
Varanasi News - डॉ. वीके सारस्वत ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और भारत साइबर और नॉन कांटैक्ट वारफेयर में मजबूत हो रहा है। उन्होंने नई तकनीकों जैसे डायरेक्टिव एनर्जी वेपंस और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट के विकास पर जोर दिया। इसके अलावा, साइबर सिक्योरिटी और स्वदेशी जीपीएस पर भी काम चल रहा है।
वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप बदल जाएगा। अब समय साइबर और नॉन कांटैक्ट वारफेयर का है। हमारा देश भी इसी लिहाज से खुद को मजबूत कर नई तकनीकियों के विकास में लगा हुआ है। नीति आयोग के सदस्य, जेएनयू के कुलाधिपति और रक्षा वैज्ञानिक पद्मभूषण डॉ. वीके सारस्वत ने शुक्रवार को विशेष बातचीत के दौरान ये तथ्य साझा किए। डॉ. सारस्वत बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। डॉ. सारस्वत ने कहा कि नॉन कांटैक्ट वारफेयर के लिहाज से हमें डायरेक्टिव एनर्जी वेपंस, लांग रेंज एयर टु एयर और एयर टु सरफेस मिसाइल विकसित करना है।
हमें अपने एयरक्राफ्ट को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस करना है। देश में इसके लिए एडवांस मीडियम कांबेट एयरक्राफ्ट (एम्का) प्रोग्राम शुरू किया गया है। यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान होगा, जो दुश्मन के क्षेत्र में लगभग अदृश्य होगा। अमेरिका, रशिया और चीन के पास ऐसे एयरक्राफ्ट हैं। डॉ. सारस्वत ने कहा कि हमें अपनी सैटेलाइट क्षमता बढ़ानी होगी, जिससे हम लगातार दुश्मन की निगरानी कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सिक्योरिटी दुनिया के लिए बड़ा मुद्दा है। हमें विदेशी मुल्कों के साइबर हमलों को बेकार करने की तकनीकी विकसित करनी होगी। इसके लिए स्वदेशी जीपीएस विकसित करने पर भी काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि हम देश में स्टेट ऑफ द आर्ट डिफेंस सिस्टम बना रहे हैं। दिल्ली की रक्षा के लिए भी एयर डिफेंस सिस्टम लगाया है। अग्नि-6 पर उन्होंने कहा कि खतरे के हिसाब से तकनीकी का विकास होता है। अग्नि-5 तक की तकनीकी अब तक के खतरों से निपटने में सक्षम है। हमने इसके बाद प्रलय, प्रहार जैसे मीडियम रेंज मिसाइल बनाए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के सवाल पर बोले कि इसमें एस-400 को छोड़कर सभी आयुध स्वदेशी थे। आकाश, ब्रह्मोस, एंटी ड्रोन सिस्टम, रडार, आर्टिलरी सभी सिस्टम हमारे देश में विकसित हैं। हम किसी पर निर्भर नहीं। हमारे पास कोई भी युद्ध जीतने के लिए हर तरह के हथियार मौजूद हैं। भारत ने रक्षा क्षेत्र में काफी काम किया है। बनारस के लिए उन्होंने कहा कि यहां आना हमेशा एक सुखद अनुभव होता है। यहां साक्षात भगवान शिव और माता पार्वती की उपस्थिति महसूस होती है। बनारस में खानपान, पहनावा, पूजा पाठ, सद्भावना सभी में भारतीय संस्कृति का अनुभव होता है। फिल्मों पर रोक पड़ोसी मुल्क का अपराधबोध हाल में रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ के पाकिस्तान सहित मुस्लिम देशों में बैन पर डॉ. सारस्वत ने कहा कि यह उनका अपराधबोध है। कहा कि फिल्म में संसद पर हमले और 26-11 जैसी घटनाएं दिखाई गई हैं। सभी को पता है कि इनके पीछे कौन है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




