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लोटा-भंटा मेले में भोले को लगा बाटी-चोखा का भोग

बनारसी मन-मिजाज से जितना अक्खड़-फक्कड़, उतना ही घुमक्कड़ भी है। हर त्योहार मौसम-मौके को खूबसूरत बहाने की शक्ल देकर घुमक्कड़ी के अनुकूल बनाना,...

लोटा-भंटा मेले में भोले को लगा बाटी-चोखा का भोग
हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीMon, 04 Dec 2023 02:15 AM
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वाराणसी, प्रमुख संवाददाता।
बनारसी मन-मिजाज से जितना अक्खड़-फक्कड़, उतना ही घुमक्कड़ भी है। हर त्योहार मौसम-मौके को खूबसूरत बहाने की शक्ल देकर घुमक्कड़ी के अनुकूल बनाना, दुनियावी दिक्कतों-दुश्वारियों को खूंटी पर टांग उन्मुक्त भ्रमण को निकल जाना बनारसियों का सहज स्वभाव है।

ऐसे ही मिजाज का प्रमाण है लोटा-भंटा मेला जिसका आयोजन मार्गशीर्ष की षष्ठी तिथि पर रविवार को किया गया। काशीवासियों ने भगवान भोलेनाथ को बाटी-चोखा का भोग लगाया। नगर के जंसा, रामेश्‍वर, पंचशिवाला-हरहुआ के बीच वरुणा नदी के कछार पर लगे इस मेले के दौरान हर तरफ अहरे से उठता धुंआ ही नजर आ रहा था। मेला क्षेत्र की परिधि में तीन किमी पहले से ही जबरदस्त जाम रहा। आदि गंगा कही जाने वाली वरुणा नदी में स्‍नान के बाद रामेश्‍वर महादेव सहित विभिन्न देवालयों में दर्शन-पूजन किया। फिर प्रसाद स्‍वरूप बाटी-चोखा सगे संबंधियों संग ग्रहण किया। इसके बाद खरीदारी कर लोग घरों को रवाना हुए।

अलसुबह से ही पहुंचने लगी थी भीड़

रामेश्वर में लगने वाले सुप्रसिद्ध मेले में शामिल होने के लिए रविवार अलसुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। हजारों लोगों के आवागमन से रामेश्वर, पांचों शिवाला, रसूलपुर, चक्का सहित आसपास के कई गांव के बगीचों में भीड़ दिखी। रामेश्वर की सभी धर्मशालाएं शनिवार की देर रात्रि से ही भर गई थीं।

लोटा-भंटा मेला का महात्म्य

कहा जाता है कि भगवान राम ने दो बार काशी की पंचक्रोश परिक्रमा की थी। पिता राजा दशरथ को श्रवण कुमार के श्राप से मुक्त कराने के लिए लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ यह परिक्रमा की थी। वहीं, रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए मां सीता और लक्ष्मण के साथ प्रदक्षिणा की थी। ब्रह्महत्‍या के प्रायश्‍चित के लिए श्रीराम ने अन्‍न का त्‍याग कर दिया। श्रीराम जब वापसी में काशी आए तो यहां एक मुट्ठी रेत का शिवलिंग बना कर एक लोटा जल से पूजा कर बाटी-चोखा का भगवान शिव को भोग लगाया फिर वही प्रसाद ग्रहण किया। तब से लोटा-भंटा मेला का आयोजन स्वत:स्फूर्त होने लगा।

पुत्र प्राप्ति की पूरी होती है कामना

मान्यता है कि अगहन महीने की षष्ठी तिथि पर रामेश्वर तीर्थ पर स्नान और दर्शन-पूजन के साथ रात्रि प्रवास करने पर नि:संतान दंपतियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इस कामना से पूर्वांचल ही नहीं बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड आदि राज्यों से काफी संख्या में लोग लोटा-भंटा मेले में पहुंचते हैं।

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