
उन्नत सोच से सफल होगा दुग्ध खाद्य व्यवसाय : प्रो.चतुर्वेदी
Varanasi News - वाराणसी में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कार्यात्मक दुग्ध खाद्य विषयक 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जैव-सक्रिय दुग्ध घटक पोषण संबंधी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। कार्यशाला में तकनीकी, नियामक एवं व्यवसायीकरण से संबंधित ज्ञान प्रदान करने का विश्वास व्यक्त किया गया।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। जैव-सक्रिय दुग्ध घटक पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान एवं निवारक स्वास्थ्य देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सुदृढ़ वैज्ञानिक आधार, नियामक अनुपालन एवं बाज़ार-उन्मुख सोच से कार्यात्मक दुग्ध खाद्य को सफल व्यावसायिक प्रस्ताव में बदला जा सकता है। ये बातें बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहीं। वह सोमवार को बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे। ‘कार्यात्मक दुग्ध खाद्य: संकल्पना से व्यवसायीकरण तक’ विषयक कार्यशाला में उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों को तकनीकी, नियामक एवं व्यवसायीकरण से संबंधित जरूरी ज्ञान देगी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो.शतिष कुमार ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम खाद्य विज्ञान, दुग्ध प्रौद्योगिकी एवं संबद्ध क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रबंध अध्ययन संकाय के प्रमुख प्रो.सुजीत कुमार दुबे ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार तभी सार्थक हो सकता है जब उसके साथ उपभोक्ता व्यवहार, स्वास्थ्य-आधारित मांग एवं बाज़ार गतिकी की स्पष्ट समझ जुड़ी हो। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो.राज कुमार दुआरी, पाठ्यक्रम निदेशक प्रो.अनिल कुमार चौहान, डॉ.तरुण वर्मा ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ.अंकिता हुड्डा तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.अरविंद कुमार ने किया।

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