कृषि उत्पादों के निर्यात में 70 फीसदी गिरावट

हिन्दुस्तान, वाराणसी
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अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का असर पूर्वांचल के किसानों पर पड़ा है। प्राकृतिक आपदाओं के बीच, किसानों का सब्जियों और फलों का निर्यात लगभग ठप हो गया है। मार्च से केवल 30% निर्यात हुआ है। खाड़ी देशों के लिए कार्गो सेवा बंद होने से स्थिति और भी खराब हुई है।

कृषि उत्पादों के निर्यात में 70 फीसदी गिरावट

वाराणसी, विशेष संवाददाता। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव की मार पूर्वांचल के किसानों पर भी पड़ रही है। प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों की सब्जियों, आम आदि कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप पड़ गया है। एक आंकड़े के मुताबिक मार्च से अब तक केवल 30 फीसदी निर्यात हुआ है। विवश होकर, किसान अपने उत्पादों को घरेलू बाजारों में बेच रहे हैं। इससे उनकी लागत को बड़ा झटका लगा है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की पहल पर वर्ष 2019 के बाद से वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही और चंदौली के किसानों के उत्पाद निर्यात हो रहे हैं।

कोरोना काल में निर्यात को थोड़ा ब्रेक लगा था, लेकिन उसके बाद से तेजी से यहां की सब्जियां और फल भेजे जा रहे थे। एक आंकड़े के मुताबिक कृषि उत्पादों का निर्यात 2020-21 में केवल 4 मीट्रिक टन था, जो 2023-24 में बढ़कर 732 मीट्रिक टन हो गया। 2024-25 में भी लगभग 700 मीट्रिक टन का निर्यात हुआ था। यहां से जाने वाले उत्पादों में आम, भिंडी, आलू, केला, सिंघाड़ा, लौकी, चावल मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें 60 से 70 फीसदी निर्यात अकेले खाड़ी देशों को होता है। सबसे कम बांग्लादेश, श्रीलंका एवं यूरोप के देशों में फल और सब्जी जाते हैं।जंग की वजह से खाड़ी देशों के लिए कार्गो सेवा लगभग पूरी तरह ठप है। वहीं यात्री फ्लाइट भी कनेक्टिंग जा रही हैं। इसलिए यहां की सब्जियों के निर्यात को झटका लग रहा है। यहां की सब्जियां और हरी मिर्च की खेप भी नहीं भेजी जा पा रही है। यहां के मिर्च की सबसे ज्यादा डिमांड होती है। उधर, आम भेजने के लिए एपीडा ने आम निर्यातकों से वार्ता शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक संभावना है कि जल्द ही हालात स्थिर होंगे तो जून के पहले हफ्ते तक सब्जियों के साथ ही आम भी भेजा जाएगा।

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