‘एडिनॉइड ग्रंथि’ बढ़ने से बच्चों में सुनने की क्षमता हो रही प्रभावित
Varanasi News - वाराणसी में बच्चों में एडिनॉइड ग्रंथि के बढ़ने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। बीएचयू के ईएनटी विभाग में पिछले एक साल में 312 मामले सामने आए हैं, जिसमें 50% बच्चों की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज से बहरेपन से बचा जा सकता है।

वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। बच्चों में एडिनॉइड ग्रंथि के बढ़ने के कारण सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। बीएचयू के ईएनटी विभाग में पिछले एक साल में इसके 312 मामले आए हैं। इसमें 50 फीसदी की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके साथ ही कई लोगों को बार-बार सर्दी-जुकाम, नाक बंद रहना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हुई। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि समय से इलाज से बच्चों को बहरेपन से बचाया जा सकता है। बीएचयू के ईएनटी विभाग के प्रो. विश्वंभर सिंह ने कहा कि एडिनॉइड ग्रंथि नाक के पीछे स्थित होती है। यह संक्रमण से लड़ने में मदद करती है।
तीन से दस वर्ष की उम्र के बच्चों में इसके अधिक बढ़ने से कान और गले को जोड़ने वाली यूस्टेशियन ट्यूब बंद हो जाती है, जिससे कान में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसके कारण सुनने में समस्या, सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही सोते समय खर्राटा लेते हैं। सांस की समस्या होने पर अक्सर अभिभावक बच्चों को बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाते हैं। वहां पर डॉक्टर सांस की समस्या समझकर इलाज किया जाता है, लेकिन बच्चे को दिक्कत एडिनॉइलड ग्रंथि बढ़ने की होती है। इसमें लापरवाही से बच्चों में बहरेपन की समस्या होने लगी है। कमजोर इम्यून-एलर्जी है कारण प्रो. विश्वंभर सिंह ने कहा कि बच्चों में एडिनॉइड ग्रंथि बढ़ने के कई कारण होते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम होना इसका एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा एलर्जी, प्रदूषण, बार-बार सर्दी जुकाम सहित अन्य कारणों से भी यह ग्रंथि बढ़ जाती है। इसके लक्षण दिखें तो तत्काल इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए साफ-सफाई, जिस भी चीज से एलर्जी हो रही है, उससे बचाएं। एलर्जी होने पर मास्क जरूर लगाएं। एडिनॉइड ग्रंथि बढ़ने के लक्षण -मुंह खोलकर सांस लेना। - खर्राटे लेना। -नाक से आवाज आना। - बार-बार कान में दर्द होना।
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