आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ताओं ने नई तकनीक विकसित की
Varanasi News - आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ताओं ने औद्योगिक अपशिष्ट जल से विषैले रासायनिक रंगों को हटाने के लिए एक नया, कम लागत वाला एडसोर्बेंट विकसित किया है। यह शोध वस्त्र उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट जल की गंभीर समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। यह एडसोर्बेंट मानव स्वास्थ्य और जल जीवन के लिए खतरनाक रसायनों को प्रभावी रूप से हटाने में सक्षम है।

वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने औद्योगिक अपशिष्ट जल से विषैले रासायनिक रंगों को प्रभावी रूप से हटाने के लिए एक अत्यंत दक्ष, टिकाऊ एवं कम लागत वाला एडसोर्बेंट (शोषक पदार्थ) विकसित किया है। इस अनुसंधान का नेतृत्व प्रो. चंदन उपाध्याय एवं अमित बार (स्कूल ऑफ मटीरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी) ने किया, जबकि डॉ. राम शरण सिंह (रसायन अभियांत्रिकी विभाग) ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह शोध वस्त्र, प्रिंटिंग एवं औषधि उद्योगों से निकलने वाले अनुपचारित रासायनिक रंगों के जल स्रोतों में बड़े पैमाने पर निर्वहन जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है।
वस्त्र उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, किंतु इससे प्रतिवर्ष अरबों लीटर ऐसा अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है, जिसमें खतरनाक एजो डाई पाई जाती हैं। ये रसायन न केवल हटाने में कठिन होते हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य एवं जलीय जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। आईआईटी (बीएचयू) की शोध टीम ने लेयर्ड डबल हाइड्रॉक्साइड्स (LDH) आधारित एक उन्नत शोषक पदार्थ विकसित किया है, जो रासायनिक स्पंज की तरह कार्य करता है। यद्यपि एडसोर्प्शन विधि को जल शोधन के लिए कम लागत वाला समाधान माना जाता है, परंतु अब तक उपलब्ध सामग्रियों में या तो दक्षता कम थी या उनका निर्माण अत्यधिक महंगा था। यह नई तकनीक इन दोनों चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।

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