धान में डीएसआर तकनीक को स्वीकार करें किसानः केवी राजू
Varanasi News - वाराणसी में चावल पॉलिसी पर दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। विशेषज्ञों ने पारंपरिक खेती के बजाय स्मार्ट खेती को प्राथमिकता देने की बात की। आईसीआरआईईआर और इरी के संयुक्त संवाद में चावल उत्पादन से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई। तकनीकी अपनाने और पर्यावरण के अनुकूल नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

वाराणसी, हिटी। चांदपुर स्थित इरी-दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईसार्क) में शनिवार से चावल पॉलिसी पर दो-दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक शुरू हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि अब समय केवल पारंपरिक खेती का नहीं, बल्कि आंकड़ा और तकनीक आधारित स्मार्ट खेती का है। अब विभिन्न संस्थानों को साझा जिम्मेदारी के साथ मिलकर काम करना होगा। आईसीआरआईईआर और इरी की ओर से आयोजित संयुक्त राष्ट्रीय नीति संवाद में ईरी अध्यक्ष ईवान पिंटो, भारत सरकार के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक सहित अन्य हितधारकों ने चावल उत्पादन के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू ने गिरते भूजल और बढ़ती श्रम लागत पर चिंता जताई।
कहा कि धान उत्पादन में डीएसआर जैसी तकनीकों को स्वीकार करना चाहिए।प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा कि अब हमें ऐसी नीतियों की जरूरत है जो पर्यावरण के अनुकूल खेती और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दें। प्रमुख सचिव (कृषि) रवींद्र ने उत्पादकता वृद्धि, ज्ञान प्रसार और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर जोर दिया। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर. कम्बोज ने कहा कि वर्तमान तकनीकों का सही उपयोग करके ही 30 फीसदी तक पैदावार बढ़ाई जा सकती है। इस मौके पर पंजाब किसान और खेत मजदूर आयोग के अध्यक्ष डॉ. सुखपाल सिंह, विश्व बैंक की कृषि विशेषज्ञ सौम्या श्रीवास्तव, फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के महानिदेशक डॉ. परेश वर्मा, आईएसएआरसी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और आईआरआरआई के शोध निदेशक डॉ. वीरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।
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