बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) परिसर में लगे एक लाख से अधिक पेड़ पर्यावरण संरक्षण और हरीतिमा संवर्धन को धार दे रहे हैं।
बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में वृक्षारोपण, पर्यावरण मित्रणी उपक्रियाएं और संवर्धनशील विकास की बढ़ती दिशा।

वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) परिसर में लगे एक लाख से अधिक पेड़ पर्यावरण संरक्षण और हरीतिमा संवर्धन को धार दे रहे हैं। इससे बरेका का लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र हरीतिमा से आच्छादित है। ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और उच्च अश्व शक्ति वाले विद्युत इंजनों का निर्माण शुरू करने से लेकर अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, ग्रीन एनर्जी, स्काडा प्रणाली भी इस दिशा में प्रभावी कदम साबित हुआ है।
हरितिमा का धारक
बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने बताया कि 2017 से बरेका ने ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल तथा उच्च अश्वशक्ति वाले विद्युत इंजनों का निर्माण शुरू किया। रेलवे की 100 प्रतिशत विद्युतीकरण नीति और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लक्ष्य के अनुरूप अब बरेका में मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का निर्माण किया जा रहा है।
सीवेज गंगा में नहीं
12 एमएलडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा 3 एमएलडी क्षमता वाला औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र होने से बरेका से निकलने वाला सीवेज गंगा में नहीं छोड़ा जाता। जल संरक्षण की दिशा में इस वर्ष निर्मित 41 गहरे रिचार्ज कुओं सहित बरेका में कुल 71 गहरे रिचार्ज कुओं का निर्माण किया गया।
ग्रीन एनर्जी
जीएम ने बताया कि ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बरेका ने 3.87 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-संलग्न सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। स्काडा प्रणाली लागू होने से डीजी सेट की डीजल खपत में वर्ष 2024-25 की तुलना में 45.81 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
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