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VIDEO: जर्मन साइक्लिस्ट जोड़ा आया आध्यात्मिक ऊर्जा लेने

शिक्षक दंपति कर अबतक चुका है 17 हजार किमी की साइकिल यात्रा

साइकिल से दुनिया के प्रमुख देशों की यात्रा पर निकला जर्मन जोड़ा स्वयं को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण करने बनारस पहुंचा। फरवरी 2017 में जर्मनी के बीब्रेच शहर से साइकिल से चले शिक्षक पति-पत्नी राल फ्लांग और श्रीमती एमके फ्राडरमैन का मुख्य लक्ष्य साइकिल यात्रा पूरी करना नहीं बल्कि राजस्थान में गरीब बच्चों के लिए शुरू आवर स्कूल की सफलता है।

प्रख्यात सरोद वादक पं. विकास महाराज के मित्र शिक्षक दंपती ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बनारस दुनिया का सबसे जीवंत धार्मिक शहर है। यहां के ऊर्जा का सबसे बड़ा माध्यम गंगा और घाट किनारे के पवित्र स्थल हैं। ट्रैफिक के मामले में इस शहर का मिजाज दुनिया के दूसरे शहरों से बिल्कुल जुदा है। इसलिए वे यहां साइकिल से आने की हिम्मत नहीं जुटा सके। दिल्ली से वह ट्रेन से आए और फिर दिल्ली जाकर साइकिल यात्रा शुरू करेंगे। 

उन्होंने बतया कि वे अब तक 17 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं और करीब इतनी ही यात्रा शेष है। पिछले सप्ताह साइकिल यात्रा करते हुए भारत पहुंचने के बाद वे सबसे पहले राजस्थान गए जहां आवर स्कूल संचालित होता है। जहां इन दिनों 65 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। जर्मनी के गेवार्ड मूलर स्कूल के शिक्षक राल फ्लांग के अनुसार इस स्कूल के लिए फंडिंग मूलर स्कूल के बच्चे अपनी पॉकेटमनी से करते हैं। वे बच्चे अब तक 70 हजार यूरो जुटा चुके हैं। विभिन्न देशों का सफर करते हुए उनकी साइकिल यात्रा इस वर्ष के अंत में ऑस्ट्रेलिया में पूरी होगी। 

शिक्षक दंपती रह गए भौचक
बातचीत के बाद अपनी साइकिल यात्रा का प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए शिक्षक दंपती ने पिपलानी कटरा क्षेत्र में कुछ दूर साइकिल जरूर चलाई। साइकिल पर सवार होकर पति-पत्नी आगे बढ़ने से पहले हाथ मिला रहे थे कि दोनों के हाथ के बीच से एक तीसरा साइकिल सवार निकल गया। उसे देख कर दोनों भौचक रह गए।

ट्रेन से 12 घंटे लेट पहुंचना भी यादगार
शिक्षक दंपती का हौसला बढ़ाने के लिए जर्मनी के बीब्रेच शहर के मेयर और पेशे से खेल शिक्षक हर्बट हेगल ने बताया कि हम दिल्ली से शिवगंगा से चले तो हमें बिल्लुक उम्मीद नहीं थी कि हम 12 घंटे लेट हो जाएंगे लेकिन ट्रेन का लेट होना भी हमारे लिए यादगार हो गया। इस दौरान हमने भारत-जर्मनी के दोस्ताना संबंधों से लेकर आवर स्कूल और खेल के बारे में बहुत सारी चर्चाएं कीं। उन्होंने कहा कि यदि भारत को खेल में आगे आना है तो प्राथमिक विद्यालय स्तर पर खेलों को प्रमुखता देनी होगी।

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