Ganga Festival Yela s pakhavaj playing magic - गंगा महोत्सव में येल्ला के पखावज वादन ने जादू कर दिया, VIDEO DA Image
12 नबम्बर, 2019|5:58|IST

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गंगा महोत्सव में येल्ला के पखावज वादन ने जादू कर दिया, VIDEO

गंगा महोत्सव में येल्ला के पखावज वादन ने जादू कर दिया

1 / 2गंगा महोत्सव की तीसरी निशा में रविवार को येल्ला वेंकटेश्वर राव के पखावजवादन का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। मां गंगा को समर्पित ताल रचना के माध्यम से पद्मभूषण येल्ला वेंकटेश्वर ने महोत्सव की अब तक...

गंगा महोत्सव में येल्ला के पखावज वादन ने जादू कर दिया

2 / 2गंगा महोत्सव की तीसरी निशा में रविवार को येल्ला वेंकटेश्वर राव के पखावजवादन का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। मां गंगा को समर्पित ताल रचना के माध्यम से पद्मभूषण येल्ला वेंकटेश्वर ने महोत्सव की अब तक...

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गंगा महोत्सव की तीसरी निशा में रविवार को येल्ला वेंकटेश्वर राव के पखावजवादन का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। मां गंगा को समर्पित ताल रचना के माध्यम से पद्मभूषण येल्ला वेंकटेश्वर ने महोत्सव की अब तक की सर्वोत्कृष्ट ताल प्रस्तुति दी।

पखावज पर उनकी साधना का स्तर देख कर लोग उस वक्त दंग रह गए जब पं. यल्ला वेंकटेश्वर के हाथ पखावज से दूर रहे फिर भी पखावज से अनुगूंज होती रही। उनके दोनों हाथ जैसे जैसे पखावज से दूर होते गए पखावज से मुखर हो रहा नाद भी आरोही क्रम में बढ़ता प्रतीत हुआ। इतना ही नहीं जैसे जैसे हाथ पुन: पखावज के करीब आते गए वैसे वैसे नाद भी अवरोही होता गया जैसे ही दोनों हथेलियां पखावज के पर्दे से स्पर्श हुईं पखावज मौन हो गया। उन्होंने आदि ताल में चार, छह, आठ, 12, 14, 16, 18, 24 और 32 मात्रा में बोल बजाए। पहले दो दिनों की अपेक्षा श्रोता दीर्घा में बढ़ी भीड़ की बड़ी वजह पं. येल्ला वेंकटेश्वर भी थे। इस संपूर्ण प्रस्तुति में उनके साथ सह पखावज पर अभिषेक यल्ला, सितार पर आनंद मिश्र और तबले पर डॉ. बी. सत्यवर्ग प्रसाद ने संगत की।

इससे पूर्व बीएचयू की डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य का शास्त्रीय गायन हुआ। अपने सुमधुर गायन का आरंभ उन्होंने राग यमन में एकताल में विलंबित खयाल ‘आली री मोरे पिया से किया। इसके उपरांत द्रुतलय तीन ताल में ‘मैं वारी वारी जाऊंगी प्रीतम पर के गायन से श्रोताओं को आनंदित किया। राग मिश्रखमाज में ठुमरी ‘संवरिया को देखे बिना नाही चैन के बाद राग कौशिक ध्वनि में दादरा ‘श्याम तोहें नजरिया लग जाएगी के बाद श्रोताओं के अनुरोध पर भजन ‘पतित उद्धारिणी गंगे मां से अपने गायन को विराम दिया। तीसरी प्रस्तुति मुंबई की अनुराधा पाल का एकल तबला वादन रही। उन्होंने तीन ताल में तबला वादन करते हुए स्वयं के साथ अनूठी जुगलबंदी की। वह स्वयं बोल बोलतीं और खुद ही तबले पर उन्हें जीवंत करतीं। अर्द्धनारीश्वर पर आधारित तालमय प्रस्तुति के उपरांत उनहोंने बनारस घराने के तबला वादन की खूबियों का प्रदर्शन भी किया। अंत में तबले के बोलों से नामामि गंगे नमामि गंगे का घोष करके उन्होंने अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। इससे पूर्व संध्या का आगाज वरिष्ठ गायक एवं संगीत निर्देशक पं. गणेश पाठक के गायन से हुआ। उन्होंने राग चारुकेशी में शिव भजन प्रस्तुत किया। पं. कैलाश मिश्र ने भी एकल तबला वादन किया।

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