गंगा दशहरा : कजरी-सोहर गाकर मनाया पर्व
वाराणसी में गंगा दशहरा उत्सव का आयोजन नागरी नाटक मंडली में किया गया। ग्रीष्मकालीन शिविर में सौ से अधिक प्रतिभागियों ने मां गंगा के सम्मान में गायन और नृत्य प्रस्तुत किए। सभी ने गंगा निर्मलीकरण के लिए शपथ ली और गंगा अवतरण की कथा का मंचन किया।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नगर की विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के अलावा नागरी नाटक मंडली में मंगलवार को खास अंदाज में गंगा दशहरा उत्सव मनाया गया। यहां चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर के सौ से अधिक प्रतिभागियों ने मां गंगा के सम्मान में गायन किया।
गंगा निर्मलीकरण की शपथ
कार्यक्रम में शामिल बच्चों और बड़ों ने गंगा निर्मलीकरण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए शपथ ली। परंपरा का निर्वाह करते हुए कजरी गायन किया। गंगा अवतरण दिवस पर सोहर के माध्यम से उनकी महिमा का बखान किया। प्रतिभागी बच्चों ने एकांकी के माध्यम से गंगा अवतरण की कथा प्रस्तुत की। ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक नृत्य शैलियों के माध्यम से भी प्रतिभागियों ने गंगा का गुणगान किया। पूरे मंडली परिसर को काशी के गंगा घाट के रूप में सजाया गया था। गायन की प्रशिक्षक उपशास्त्रीय गायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता ने बताया कि कजरी का गायन गंगा दशहरा से आरंभ हो जाता है जो सावन की पूर्णिमा तिथि तक चलता है।
विशेष अतिथि और जानकारी
उत्तर प्रदेश भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी ने काशी, गंगा और शिव के महत्व से प्रतिभागियों को परिचित कराया। केरल के एक संगीत महाविद्यालय की शिक्षिका एवं आकाशवाणी की ए ग्रेड कलाकार अब्रदीता बनर्जी की उपस्थिति विशेष रही। वरिष्ठ रंगधर्मी सुमन पाठक, भरतनाट्यम नर्तकी डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, ओडिसी नर्तक राहुल चक्रवर्ती ने भी विविध मंचीय विधाओं में मां गंगा की उपस्थित की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर अतिथियों को तुलसी का पौधा भेंट किया गया।
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