गंगा के अविरल-निर्मल स्वरूप के लिए किया आवाह्न
वाराणसी में गंगा दशहरे पर नमामि गंगे ने दुग्धाभिषेक किया और गंगा की सफाई के लिए जन भागीदारी का आह्वान किया। इस अवसर पर गंगा की आरती उतारी गई और लोगों को जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया।

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भारत के 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका गंगा के अवतरण दिवस गंगा दशहरा पर नमामि गंगे ने दशाश्वमेध घाट पर अविरल गंगा-निर्मल गंगा की कामना से दुग्धाभिषेक किया। मां गंगा की आरती उतारी गई। शपथ लेकर जन भागीदारी सुनिश्चित करने का आवाह्न किया गया। गंगा जयघोष के बीच राष्ट्र ध्वज लहरा कर राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। नमामि गंगे टीम के महिला और पुरुष सदस्यों ने गंगा तलहटी की सफाई कर लोगों से गंदगी न करने की अपील की। लाउडस्पीकर और स्वच्छता स्लोगन लिखी तख्तियों के द्वारा घाटों पर लोगों को जागरूक किया गया।
गंगा दशहरा स्नान के लिए उपस्थित हजारों लोगों को जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जन-भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प दिलाया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा दशहरा उस दिन के सम्मान में धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है जब देवी गंगा पृथ्वी पर आई थीं। राजा सगर के साठ हजार पुत्रों का उद्धार करने के लिए धरती पर आई गंगा तब से लेकर आज तक पृथ्वीवासियों को मुक्ति, शांति, आजीविका और आनंद प्रदान कर रही हैं। मां गंगा का दर्शन स्पर्श, पूजन और स्नान ही मानव मात्र के लिए काफी है। गंगा का शुद्ध होना हमारे पर्यावरण की स्वच्छता का महत्वपूर्ण मापदंड है। सरकार के साथ-साथ हम सभी का गंगा के प्रति जो सरोकार है उसे समझना और ईमानदारी से निभाना होगा। आयोजन में प्रमुख रूप से सारिका गुप्ता, पुष्पलता वर्मा, बीना गुप्ता, पंकज अग्रहरि, अवधेश वर्मा, पूनम वर्मा एवं श्रद्धालु शामिल रहे।
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