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गंगा दशहरा: काशी के घाटों पर होंगे धार्मिक अनुष्ठान के साथ कई आयोजन, जानिये इस दिन का महत्व

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस बार 12 जून को यह तिथि आ रही है। इसदिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद लोग पूजा-पाठ और व्रत भी रखते हैं। काशी में गंगा दशहरा पर बुधवार को दस प्रमुख घाटों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। कुछ स्थानों पर भक्ति संगीत के आयोजन भी होंगे। रामेश्वर मठ, स्वामी नारायण तीर्थ वेद विद्यालय एवं जागृति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रात: छह बजे अस्सी घाट पर गंगा का दुग्धाभिषेक होगा। परंपरा के अनुसार माता गंगा को आरपार की माला चढ़ाई जाएगी। 

दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति के पं. किशोरी रमण दुबे 51 लीटर दूध से माता का अभिषेक जबकि 11 ब्राह्मण गंगा की महाआरती करेंगे। सायंकाल सात बजे से अनुष्ठान का श्रीगणेश मंगलाचरण से होगा। इस अवसर पर गंगा की झांकी भी सजेगी। समारोह के मुख्य अतिथि यूको बैंक कोलकाता के कार्यकारी निदेशक अजय व्यास होंगे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. दया शंकर मिश्र होंगे। इसके उपरांत कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में भजन संध्या होगी। दशाश्वमेध घाट के दूसरे हिस्से में गंगा सेवा निधि की ओर से भव्य गंगा पूजन और आरती का आयोजन होगा।

शंकराचार्य घाट पर गंगा सेवा अभियानम् , हरिश्चंद्र घाट पर मोक्षदायिनी सेवा समिति, ललिता घाट पर अन्नपूर्णा मंदिर के गंगा न्यास, सिंधिया घाट पर दैनिक आरती समिति, जटार घाट पर नारायण गुरु के सानिध्य में देवदीपावली समिति, पंचगंगा घाट पर श्रीमठ और भैसासुर घाट पर केंद्रीय देवदीपावली महासमिति की ओर से गंगा पूजन होगा।
 
गंगा दशहरा की कथा
हिंदु मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा का अतवार हुआ था। यानी इसी दिन गंगा नदी का धरती पर जन्म हुआ था। ऋषि भागीरथ के तप के बाद इसी दिन गंगा धरती पर आई थीं। एक प्रचलित कथा के मुताबिक एक बार महाराज सगर ने यज्ञ किया। उस यज्ञ की रक्षा का भार उनके पौत्र अंशुमान ने संभाला। इंद्र ने सगर के यज्ञीय अश्व का अपहरण कर लिया। यह यज्ञ के लिए विध्न था। इस वजह से अंशुमान ने सगर की 60 हज़ार प्रजा लेकर अश्व को खोजना शुरू कर दिया। सारा भूमंडल खोज लिया पर अश्व नहीं मिला। फिर अश्व को पाताल लोक में खोजने के लिए पृथ्वी को खोदा गया। खुदाई परउन्होंने देखा कि साक्षात्‌ भगवान 'महर्षि कपिल' के रूप में तपस्या कर रहे हैं। उन्हीं के पास महाराज सगर का अश्व घास चर रहा है। प्रजा उन्हें देखकर 'चोर-चोर' चिल्लाने लगी।

महर्षि कपिल की समाधि टूट गई। ज्यों ही महर्षि ने अपने आग्नेय नेत्र खोले, त्यों ही सारी प्रजा भस्म हो गई। इन मृत लोगों के उद्धार के लिए ही महाराज दिलीप के पुत्र भगीरथ ने कठोर तप किया था। भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उनसे वर मांगने को कहा तो भगीरथ ने 'गंगा' की मांग की।

इस पर ब्रह्मा ने कहा- 'राजन! तुम गंगा का पृथ्वी पर अवतरण तो चाहते हो? परंतु क्या तुमने पृथ्वी से पूछा है कि वह गंगा के भार तथा वेग को संभाल पाएगी? मेरा विचार है कि गंगा के वेग को संभालने की शक्ति केवल भगवान शंकर में है. इसलिए उचित यह होगा कि गंगा का भार एवं वेग संभालने के लिए भगवान शिव का अनुग्रह प्राप्त कर लिया जाए.' महाराज भगीरथ ने वैसे ही किया।

उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने गंगा की धारा को अपने कमंडल से छोड़ा. तब भगवान शिव ने गंगा की धारा को अपनी जटाओं में समेटकर जटाएं बांध लीं। इसका परिणाम यह हुआ कि गंगा को जटाओं से बाहर निकलने का पथ नहीं मिल सका।

अब महाराज भगीरथ को और भी अधिक चिंता हुई। उन्होंने एक बार फिर भगवान शिव की आराधना में घोर तप शुरू किया। तब कहीं भगवान शिव ने गंगा की धारा को मुक्त करने का वरदान दिया। इस प्रकार शिवजी की जटाओं से छूट कर गंगाजी हिमालय की घाटियों में कल-कल निनाद करके मैदान की ओर मुड़ी। इस प्रकार भगीरथ पृथ्वी पर गंगा का वरण करके बड़े भाग्यशाली हुए।

गंगा दशहर पूजा-विधि
1. आमतौर पर गंगा दशहरा पर श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करते हैं। 
2. नहाने के दौरान 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः' का जाप करें.
3. इसके बाद  'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै स्वाहा' करके हवन करे. 
4. इसके बाद ' ऊँ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं (वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा.' इस मंत्र से पांच पुष्पाञ्जलि अर्पण करके भगीरथ हिमालय के नाम- मंत्र से पूजन करें.
5. 10 फल, 10 दीपक और 10 सेर तिल का 'गंगायै नमः' कहकर दान करें. साथ ही घी मिले हुए सत्तू और गुड़ के पिण्ड जल में डालें.
6. इसके अलावा 10 सेर तिल, 10 सेर जौ, 10 सेर गेहूं 10 ब्राह्मण को दें.

गंगा दशहरा का महत्व
हिंदुओं में गंगा दशहरा का बहुत महत्व है। इस दिन पूजा-पाठ, हवन और मुंडन जैसे शुभ काम किए जाते हैं. इस दिन लोग गंगा नदी के किनारे जाकर तप, हवन, दान और जप करते हैं। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन जिस भी चीज़ का दान करें उसकी संख्या 10 होनी चाहिए। इसके साथ ही हिंदु पुराणों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा का जन्म हुआ था। इसलिए गंगा नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।

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