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बोले काशी : दुश्वारियों से बेजार जिले का ‘प्रवेश द्वार’, अनसुनी हैं गुहार

बोले काशी : दुश्वारियों से बेजार जिले का ‘प्रवेश द्वार’, अनसुनी हैं गुहार

संक्षेप:

Varanasi News - वाराणसी के फूलपुर बाजार में लगभग छह दशकों में विस्तार हुआ है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी से व्यापारी और ग्राहक परेशान हैं। 

Dec 02, 2025 07:18 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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वाराणसी। लखनऊ-सुल्तानपुर, जौनपुर की ओर से आने वालों के लिए फूलपुर बाजार जिले का प्रवेशद्वार माना जाता है। बीते लगभग छह दशक के दौरान बाजार का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। कभी खास वस्तुओं की चंद दुकानें हुआ करती थीं, अब दैनिक और विशेष जरूरतों से जुड़े लगभग सभी सामान मिलते हैं। बाजार के व्यापार मंडल की नजर में जिला पंचायत से अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जबकि यहां के व्यापारी टैक्स देने में कोताही नहीं करते। पेयजल, जलनिकासी और सफाई के साथ शौचालय से जुड़ी समस्याएं असहज कर देती हैं। लगभग छह दशक पुराना और पड़ोसी जिले जौनपुर की सीमा से सटा फूलपुर बाजार विकास के ‘हाइवे’ पर निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है।

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इसलिए स्थानीय व्यापार मंडल चाहता है कि बाजार में बुनियादी सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त रहें। इससे व्यापारियों के साथ ग्राहकों को भी सहूलियत और सुकून मिलेगा। बाजार स्थित सामुदायिक भवन में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ बातचीत में फूलपुर उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उन समस्याओं की ओर ध्यान खींचा जिनके चलते कहीं न कहीं व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। मंडल के संरक्षक मुन्ना चौरसिया, भानुप्रकाश सेठ, अध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल सपालू ने कहा कि पांच दशक पुराने फूलपुर बाजार में स्थानीय लोगों के साथ जौनपुर के भी लोग खरीदारी करने आते हैं। ग्राहकों की आवाजाही से बाजार में रौनक रहती है लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण व्यापारियों और ग्राहकों को समस्या झेलनी पड़ती है। बोले, जिला पंचायत व्यापारियों से हर साल पंजीकरण शुल्क के साथ टैक्स वसूलता है लेकिन सुविधाओं की बात करें तो उसका ध्यान बाजार पर नहीं है। यही हाल अन्य विभागों के अधिकारियों का है। शौचालय पर लटकता ताला फूलपुर बाजार में बने सार्वजनिक शौचालय का फायदा व्यापारियों, दुकानों के स्टाफ और ग्राहकों को नहीं मिल पाता क्योंकि पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी अक्सर शौचालय पर ताला लगाकर चले जाते हैं। उपाध्यक्ष रमेश विश्वकर्मा ने कहा कि इस बाजार में महिला ग्राहक भी बड़ी संख्या में आती हैं क्योंकि आसपास कई गांव हैं। शौचालय की अव्यवस्था से सबसे ज्यादा समस्या महिला ग्राहकों को होती है। इसका असर व्यापार पर भी पड़ता है। शौचालय की कमी स्वच्छता अभियान पर भी दाग लगा रही है। आधा-अधूरा नाला बना समस्या व्यापार मंडल के अध्यक्ष जितेन्द्र जायसवाल सपालू ने ध्यान दिलाया कि बाजार में आधे अधूरे तरीके से बने नाले के कारण भी लोगों को समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। बताया कि फूलपुर थाना से माध्यमिक विद्यालय तक करीब एक किलोमीटर लंबाई में नाला निर्माण होना था लेकिन वह आधा ही बना। लगभग 500 मीटर नाले का निर्माण दो साल से अधूरा पड़ा है। इस कारण जलनिकासी की समस्या बहुत गंभीर है। बारिश में जलजमाव सबसे ज्यादा परेशानी की वजह बन जाता है। इससे व्यापारियों, निवासियों और ग्राहकों को दिक्कत उठानी पड़ती है। यह नाला नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने बनवाया था, अब पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर हो गया है। सोनू सेठ ने कहा कि यदि पीडब्ल्यूडी नाले का पूरा निर्माण करवा दे तो क्षेत्र में जलजमाव से होने वाली समस्याओं से हम लोगों को निजात मिल जाएगी। एक कर्मचारी के भरोसे सफाई फूलपुर बाजार उद्योग व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष राहुल जायसवाल, सुनील पटेल गुड्डू के मुताबिक बाजार में सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं है। पूरे बाजार के लिए केवल एक सफाई कर्मी तैनात किया गया है, वह अकेला कहां तक सफाई करेगा? बताया कि व्यापारियों को ही दुकानों के आगे सड़क झाड़ू लगानी पड़ती है। जब व्यापारियों से पूरा टैक्स लिया जाता है तो छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों किया जा रहा है? व्यापारी राहुल गुप्ता, कमलेश गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, राजेंद्र कनौजिया ने कहा, स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के मानकों का पालन हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। व्यापारी इसका पालन करते हैं तो संबंधित विभाग को भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग से परेशान फूलपुर बाजार के व्यापारी खाद्य सुरक्षा विभाग की मनमानी से परेशान हैं। मीडिया प्रभारी राजकुमार गुप्ता राजू ने कहा कि खाद्य वस्तुओं के सैंपल के नाम पर विभागीय कर्मचारी मनमानी करते हैं, व्यापारियों का उत्पीड़न किया जाता है। सभी मानकों का पालन करने के बाद भी ये कर्मचारी कोई न कोई कमी निकाल देते हैं और भारी जुर्माना लगाने की धमकी देते रहते हैं। व्यापारियों का भयादोहन किया जाता है। कील में लटका दिया तार बिजली विभाग के कर्मचारियों की कोई न कोई कारस्तानी हर जगह दिख जाती है। सोनू गुप्ता ने बताया कि घर के सामने लगा पोल टूट गया तो बिजली कर्मचारी घर के जरूरी कार्य के लिए लगी लोहे की कील में तार लटका कर चले गए। इसे ठीक करने के लिए अब तक एक दर्जन बार विभाग में चक्कर लगा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परिवार के जान-माल की चिंता बनी हुई है। बिजली विभाग को जल्द से जल्द तारों को व्यवस्थित करना चाहिए। संगठन मंत्री संजय कनौजिया, सचिव विक्की गोंड, ऋषभ गुप्ता ने ध्यान दिलाया कि कुछ अन्य जगहों पर भी बिना खंभे के तार ले जाया गया है। महादेव नगर, हनुमान नगर, भुसौली रोड, लठवां मार्ग पर कई खंभों की आवश्यकता है। सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव फूलपुर व्यापार मंडल ने सामाजिक सरोकारों पर भी ध्यान देना शुरू किया है। अध्यक्ष जितेंद्र जायसवाल सपालू ने बताया कि व्यापार मंडल प्रत्येक दुकान से प्रति माह सहयोग राशि के रूप में 20 रुपये लेता है। इसका उपयोग सामाजिक कार्यों के साथ व्यापारियों के साथ किसी आकस्मिक दुर्घटना में उनकी मदद के रूप में किया जाता है। इसके अलावा समय-समय पर व्यापारी सामूहिक श्रमदान कर सफाई भी करते हैं। ब्लड डोनेशन के लिए समय-समय पर शिविर लगता है। व्यापारी खुद रक्तदान करते हैं, अपने परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदारों, परिचितों को भी इस सामाजिक कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पौधरोपण भी किया जाता है। पेयजल में रहती दुर्गंध जर्नादन प्रसाद, उपाध्यक्ष रमेश विश्वकर्मा, महामंत्री जेपी पटेल ने कहा कि क्षेत्र में दूषित और बदबूदार जलापूर्ति की समस्या बहुत गंभीर है। कई बार जल निगम में इसकी शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गर्मी में सर्वाधिक समस्या व्यापारियों, दुकानों के स्टाफ और ग्राहकों को होती है। व्यापारियों ने कहा कि फूलपुर बाजार में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत है। साथ ही जल निगम के अधिकारियों को इस समस्या के समाधान की पहल करनी चाहिए। सुझाव और शिकायतें सुझाव 1. जिला पंचायत व्यापारियों से जो टैक्स लेता है, उसके बदले बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। 2. खाद्य सुरक्षा विभाग नियमों के तहत सैंपल एकत्र करे। लेकिन व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए। 3. जिला पंचायत क्षेत्र में प्रतिदिन बेहतर सफाई कराए। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। 4. क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा के साथ शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। पुरानी समस्या दूर होगी। 5. पीडब्ल्यूडी को सड़क के दोनों किनारों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछवाना चाहिए। इससे आवागमन सुगम होगा। शिकायतें 1. जिला पंचायत व्यापारियों से पंजीकरण शुल्क के साथ टैक्स वसूलता है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलती हैं। 2. खाद्य सुरक्षा विभाग दुकानों पर सैंपलिंग के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न करता है। 3. सफाईकर्मी अक्सर नहीं आते हैं, गंदगी पसरी रहती है। सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। 4. क्षेत्र में बदबूदार पानी की आपूर्ति होती है। इससे पानी का संकट रहता है। गर्मी में दिक्कत बढ़ जाती है। 5. बाजार के मुख्य मार्ग के किनारे दो साल से इंटरलॉकिंग टाइल्स नहीं बिछाई गई है। --------- सुनें हमारी भी पांच दशक से भी अधिक पुराने बाजार में कई बुनियादी समस्याएं हैं। उनका समाधान होना चाहिए। मुन्ना चौरसिया बाजार में सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं है, इस कारण बहुत दिक्कत होती है। राहुल बाजार में जलनिकासी की समस्या गंभीर है। इसका जल्द समाधान निकलना चाहिए। जितेंद्र जायसवाल सपालू बाजार में कम से कम दो और सार्वजनिक शौचालय का निर्माण होना चाहिए। रमेश विश्वकर्मा पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालय न होने से महिला ग्राहकों को दिक्कत होती है। सोनू गुप्ता बाजार में जो सार्वजनिक शौचालय है, वह ज्यादातर समय बंद रहता है। राजकुमार गुप्ता फूलपुर बाजार में कचरा प्रबंधन बेहतर नहीं है। कूड़े का सही निस्तारण होना चाहिए। कमलेश गुप्ता बिजली के खंभे टूटे हुए हैं। बाजार में कुछ जगहों पर खंभे लगने चाहिए। भानुप्रकाश सेठ मुख्य सड़क पर दो साल से इंटरलॉकिंग टाइल्स नहीं लगाई गई है। राहुल गुप्ता बाजार में पेयजल किल्लत बनी रहती है। गर्मी में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। सोनू सेठ कूड़े का सही निस्तारण होना चाहिए। इससे स्वच्छता बनाए रखना आसान होगा। राजेंद्र प्रसाद कनौजिया ---------- बोले जिम्मेदार संबंधित विभागों से समाधान कराएंगे फूलपुर की सबसे बड़ा समस्या खस्ताहाल सड़क थी जिसे दूर किया गया। बिजली, पेयजल व्यवस्था के साथ नाली और पटरी की मांग संज्ञान में लाई गई है। संबंधित विभागों से जानकारी लेने के साथ शासन स्तर पर बातचीत कर समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। बिजली विभाग की शिकायतें भी अधिकारियों से बातचीत कर जल्द हल कराई जाएंगी। डॉ. अवधेश सिंह, विधायक-पिंडरा विधानसभा क्षेत्र। फंसने पर लगा देते हैं आरोप व्यापारी सैंपल लेने का विरोध करते हैं। सैंपल फेल होने पर जिनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, वे पैसे लेने का आरोप लगा देते हैं। सैंपलिंग में पारदर्शिता बरती जा रही है। जो सैंपल लिए जाते हैं, उनकी जांच बनारस में नहीं होती। रैंडम किसी अन्य जिले में सैंपल भेजा जाता है। ऐसे में हम लोगों की कोई भूमिका नहीं होती। अगर कहीं भी फूड इंस्पेक्टर पैसे मांगें तो उसकी शिकायत हमें जरूर करें। कौशलेंद्र शर्मा, खाद्य सुरक्षा आयुक्त (द्वितीय) एवं जिला अभिहित अधिकारी, वाराणसी