Varanasi News: पौधों में गलन और फलियों में सड़न शुरू
Varanasi News: वाराणसी में तेज बारिश और बाढ़ के कारण सब्जी फसल को व्यापक नुकसान का खतरा है। किसानों का कहना है कि मिर्च और अन्य सब्जियों में सड़न शुरू हो गई है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने किसानों को उचित प्रबंध करने की सलाह दी है।

Varanasi News: वाराणसी, हिटी। कई दिनों से रूक-रूक कर तो इधर बीच लगातार तेज बारिश एवं गंगा-वरुणा के तटवर्ती खेतों में बाढ़ का पानी पहुंचने से सब्जी फसलों को व्यापक नुकसान होने की आशंका है। फूलगोभी और चौलाई के पौधों में गलन जबकि नेनुआ, खीरा, कोहड़ा और परवल की फलियों में कीचड़ की वजह से सड़न शुरू हो गई है। सम्भावित नुकसान की सोचकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। आराजी लाइन ब्लॉक के बेलवा, शाहंशाहपुर, सिंहोरवा दक्षिणी, जक्खिनी, बहादुरपुर, रमईपुर, जमुनीपुर, मरूई, इटही, हेड के पूरा, चिरईगांव के रमचंदीपुर, गोबरहां, मुस्तफाबाद, मोकलपुर के अलावा लोहता क्षेत्रगांवों के किसानों ने बड़े रकबे में मिर्च, टमाटर, बैगन, नेनुआ, परवल, केला और कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती की है। इन सबके खेतों में पानी लग गया है。
किसानों की चिंताएं
जक्खिनी संवाद के अनुसार, अभी बाढ़ का पानी मिर्जापुर से वाराणसी सीमा में नहीं आ रहा है। लेकिन किसानों को चिंता है कि गंगा में बढ़ाव जारी रहा तो फसलों को भारी नुकसान होना तय है। शाहंशाहपुर के कुंजबिहारी पटेल, यशपाल, मुकेश सिंह, दिवेश सिंह, आशीष सिंह आदि ने बताया कि इस समय 60 से 70 प्रतिशत मिर्च की फसल की रोपाई हो गई है। बाढ़ आने पर कृषकों की कमर टूट जाएगी। इटही के किसान कन्हैया पटेल ने बताया कि नेनुआ, खीरा, कोहड़ा, परवल आदि फसलों की फलियां कीचड़ के संपर्क में आने से सड़ जा रही है।
फसल प्रबंधन के उपाय
मचान पर चढ़ाएं और खर-पतवार निकालें
शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि किसान अपने खेतों से पानी निकासी का उचित प्रबंध करें। कद्दूवर्गीय और अन्य सब्जी को मेड़ पर लगाएं और उन्हें मचान पर चढ़ाने की व्यवस्था करें। खर-पतवारों को खेत से बाहर निकालें। निदेशक ने बताया कि कोई भी दवा या खाद बारिश की स्थिति को देखते हुए डालें। खाद या रसायन कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही प्रयोग करें।


