केंचुए जैविक इंडिकेटर, कम करतें हैं उर्वरक निर्भरता

Newswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
share

Varanasi News - वाराणसी के काजीचक गांव में आईआईवीआर ने 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मृदा स्वास्थ्य, जैव-उर्वरकों और सतत कृषि पद्धतियों पर जानकारी दी गई। निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में 158 किसान शामिल हुए, जिनमें 70 महिलाएं थीं।

केंचुए जैविक इंडिकेटर, कम करतें हैं उर्वरक निर्भरता

जक्खिनी (वाराणसी), संवाद। काजीचक गांव (आराजी लाइन) में मंगलवार को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर, शहंशाहपुर) ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मृदा (मिट्टी) स्वास्थ्य संरक्षण, जैव-उर्वरकों के उपयोग और सतत कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि मिट्टी में केंचुए समेत कई सूक्ष्मजीवी खेतों के जैविक संकेतक (इंडिकेटर) होते हैं। इनकी वजह से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। निदेशक ने किसानों का वैज्ञानिक कृषि तकनीक अपनाने का आह्वान किया। फसल विविधीकरण नीति अपनाने, संतुलित उर्वरक के प्रयोग और खाद्य तेल की मात्रा कम करने पर जोर दिया।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने मृदा में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर चर्चा की। संस्थान में विकसित विभिन्न सूक्ष्मजीवी उत्पादों के लाभ और उपयोग की वैज्ञानिक विधियां समझाईं। दावा कि इनके प्रयोग से उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। डॉ. एसके सिंह ने संतुलित पोषण प्रबंधन में मृदा परीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। किसानों को जैव उर्वरक के प्रयोग की वैज्ञानिक विधि बताई।कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार दुबे ने किसानों के साथ संवाद किया। बताया कि मिट्टी जीवित तंत्र है। इसे स्वस्थ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। केवीके (कल्लीपुर) के डॉ. नवीन सिंह की मानें तो उर्वरकों का संतुलित और आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने हरी खाद के फायदे पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने किसानों में बैक्टीरियल एनपीके जैव-उर्वरक ‘काशी एजो बीसी-पी’, ‘काशी एजो बीसी-एल’, ‘ट्राइकोडर्मा’ और ‘काशी बायोडर्मा’ वितरित किया। संतुलित पोषक तत्वों के प्रबंधन, सूक्ष्मजीव आधारित जैव उर्वरकों के प्रयोग और मृदाा नमूना लेने की विधि संबंधी पुस्तिका किसानों को दी गई। संवाद सत्र में किसानों ने मृदा उर्वरता, फसल पोषण और जैव उर्वरक संबंधी समस्याओं पर चर्चा की। कृषि वैज्ञानिकों ने उनका समाधान किया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष पांडेय, श्रीप्रकाश, अजय कुमार यादव, यशपाल सिंह और विवेक सिंह ने किसानों की समस्याएं सुनीं। इस मौके पर ग्राम प्रधान अशोक कुमार समेत 158 किसान मौजूद रहे। इनमें 70 महिला और 88 पुरुष अन्नदाता थे।

Voice of UP

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।