
‘अर्थात गांव का महाभारत’ में आज के गावों की तस्वीर
Varanasi News - वाराणसी में 'अर्थात गांव का महाभारत' संग्रह का विमोचन हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुक्ता ने कहा कि ये कहानियां गांवों की वास्तविकता को दर्शाती हैं और आज की पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। इस अवसर पर कई साहित्यकारों ने कहानी संग्रह की सराहना की और इसे कथा साहित्य में योगदान बताया।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। ‘अर्थात गांव का महाभारत’ संग्रह की कहानियां मौजूदा दौर के गांवों की असल तस्वीर उपस्थित करती हैं। मूल्यों और सिद्धांतों के साथ पूरी सजगता के साथ खड़े रहने वाले गांव अब किस कदर अपने रास्तों से डोलने लगे हैं, यह भी इन कहानियों में मौजूद है। ये बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुक्ता ने कहीं। वह हिंदी हितैषी परिषद की ओर से सोमवार को अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय में आयोजित विमोचन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि ओम धीरज की हर कहानी में बहुत ही गूढ़ संदेश छिपा हुआ है। उन संदेशों से परिचित होना आज की पीढ़ी के लिए भी जरूरी है।
अध्यक्षीय संबोधन में साहित्यभूषण डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा साहित्य वही है, जो पाठक को भीतर तक झंकृत कर दे। कवि ओम धीरज की कहानियों में मन को झकझोर देने वाले सभी तत्व विद्यमान हैं। साहित्यभूषण से सम्मानित प्रो. इंदीवर पांडेय ने कहा कि कथा साहित्य इस कृति से समृद्ध हुआ है। डॉ. श्रद्धानंद ने समकालीन कहानियों की चर्चा की। डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा ओम धीरज की कहानियां मानवीय संवेदना को बचाने रखने की वकालत करती हैं। सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्रनाथ मिश्र ने संग्रह की कहानियों के कथोपकथन और भाषा शिल्प की सराहना की। स्वागत डॉ. कवींद्र नारायण, संचालन नवगीतकार हिमांशु उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने किया। इस मौके पर डॉ. अत्रि भारद्वाज, सुरेंद्र वाजपेयी, छाया शुक्ला, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. शशिकला पांडेय, केशव शरण, रामानंद दीक्षित, एसएन उपाध्याय, प्रकाश श्रीवास्तव, प्रसन्न वदन चतुर्वेदी, वेदप्रकाश पांडेय, विजय शंकर पांडेय, गिरिजेश तिवारी, संतोष श्रीवास्तव‘प्रीत’, शिव कुमार ‘पराग’, गणेश गंभीर आदि उपस्थित रहे।

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