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गंगा आरती में की आत्मीय आनंद की अनुभूति

पांचवीं बार गंगा आरती में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 70 मिनट दशावमेध घाट पर बिताए। इस दौरान सात मिनट उन्होंने गंगा पूजन किया और 42...

गंगा आरती में की आत्मीय आनंद की अनुभूति
गंगा आरती में की आत्मीय आनंद की अनुभूति
हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीWed, 19 Jun 2024 02:00 AM
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वाराणसी, मुख्य संवाददाता।
पांचवीं बार गंगा आरती में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 70 मिनट दशावमेध घाट पर बिताए। इस दौरान सात मिनट उन्होंने गंगा पूजन किया और 42 मिनट तक गंगा आरती का हिस्सा बने। इस दौरान ऐसा लगा मानों प्रधानमंत्री आत्मीय आनंद की अनुभूति कर रहे हों।

प्रधानमंत्री शाम 7:02 बजे दशाश्वमेध घाट पहुंचे। उन्होंने अपनी पादुका वाहन में ही उतार दी। लाल कालीनों में ढंकी घाट की सीढ़ियां उतरते वक्त डॉ.आरपी घाट पर जुटे लोगों का अभिवादन भी किया। आरती स्थल पर गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी और सचिव हनुमान यादव ने बुके देकर उनका स्वागत किया। वह घाट पर लगाई गई जेटी पर पहुंचे जहां नौ अर्चकों ने मां गंगा का पूजन कराया। प्रधानमंत्री ने मां गंगा की विधिवत पूजा के बाद यथास्थान पांच प्रदक्षिणा भी की। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहे।

इसके बाद घाट के दक्षिणी छोर पर खड़ी जनता का अभिवादन करते हुए प्रधानमंत्री उस मढ़ी की ओर बढ़े जो अब उन्हीं के नाम से विख्यात हो चुकी है। गंगा आरती स्थल से सात सीढ़ी पहले मढ़ी के नीचे पड़ने वाले मंदिर को देख कर कुछ क्षण रुके। वहां खड़े गंगा सेवा निधि के स्वयंसेवक से मंदिर के बारे में पूछा इसके बाद पुन: घाट के दक्षिणी छोर पर स्थित मढ़ी की ओर बढ़े। मढ़ी से पहले बनाई गई फूलों की रंगोली देख कुछ पल फिर ठिठके। मढ़ी पर पहुंचकर पुन: हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। इसके बाद स्वच्छ गंगा की शपथ दिलाने का क्रम आरती आयोजकों के साथ प्रधानमंत्री ने भी ली। मढ़ी पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच कुर्सी पर प्रधानमंत्री बैठे।

इधर 11 अर्चकों ने आरती की प्रक्रिया शुरू की। ‘अच्युतम केशवम नाम नारायण... के गायन संग गंगा आरती शुरू हुई। करीब चार मिनट के संकीर्तन में प्रधानमंत्री भी ताली बजाते हुए शामिल रहे। संकीर्तन के बाद रामजनम योगी ने शंखनाद आरंभ किया। अनवरत शंखवादन की कला में निपुण रामजनम योगी को दो मिनट के बाद उनके बगल में खड़े गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने रुकने का संकेत किया। फिर डमरुओं के निनाद और घंटियों की अनुगूंज के बीच आरती आरंभ हुई।

शाम 7: 31 बजे ‘जय जय भगीरथ नंदिनी... के गायन के साथ मां गंगा की पुष्प आरती शुरू हुई। आरती के हर विधान को प्रधानमंत्री गौर से देखते रहे। बेशक शीतल हवा के लिए मढ़ी पर प्रबंध था इसके बावजूद उमस भरे माहौल में कुछ एक बार प्रधानमंत्री पसीना पोछते हुए दिखे मगर आरती की तरफ उनका पूरा ध्यान रहा। 7:36 बजे ‘ओम जय गंगे माता के गायन के साथ दीप आरती आरंभ हुई तो पीएम ने पुन: दोनों हाथ जोड़ लिये। रात 8: 01 बजे ‘पूजा वसान समये... मंत्र के साथ आरती का अंतिम चरण आरंभ हुआ और 7: 50 बजे ‘देवी सुरेश्वरी भगवती गंगे... के गायन के साथ आरती पूर्ण हुई। पूरा विधान प्रधानमंत्री मनोयोग से देखते रहे। आरती संपन्न होने के बाद उन्होंने पुन: हाथ जोड़ कर और सिर झुकाकर मां गंगा को नमन किया।

इसके बाद सभी 11 अर्चक मां गंगा को दुग्ध अर्पण करने के लिए तट की ओर रवाना हुए दूसरी तरफ गायक मंडली ने ‘ओम नम: शिवाय बोलो ओम नम: शिवाय संकीर्तन शुरू कर दिया। करीब पांच मिनट तक के संकीर्तन में प्रधानमंत्री ताली से ताल देते हुए इसमें शामिल रहे। रात 8:09 बजे गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने प्रधानमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। यह प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ काशी के गंगा घाटों एवं विश्वनाथ धाम की तस्वीरों का कोलाज था। निधि के सचिव सुरजीत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को भी स्मृति चिह्न भेंट किया। रात 8: 13 बजे प्रधानमंत्री जनता का अभिवादन करते दशाश्वमेध घाट से विश्वनाथ मंदिर रवाना हुए।

इन विशिष्टजनों की रही उपस्थिति

पद्मश्री डॉ. कमलाकर त्रिपाठी, पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, डॉ. सत्यनाम संखवार, डॉ. एचएस.शुक्ला, डॉ. एसके. शुक्ला, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ.नीरजा माधव, डॉ.अमित रस्तोगी, डॉ. कामेश्वर उपाध्याय, डॉ. देवव्रत चौबे, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. अरविन्द जोशी, डॉ. दीपक गौतम, डॉ. धर्मेंद्र पांडेय, डॉ. अजय तिवारी, डॉ.राजेंद्र सिंह, डॉ. बेनी माधव, पं. सतीशचंद्र मिश्र, डॉ.अमित तिवारी।

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