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हर व्यक्ति को मिलता है कर्मानुसार फल अथवा दंड

हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीNewswrap
Fri, 03 Dec 2021 03:11 AM
हर व्यक्ति को मिलता है कर्मानुसार फल अथवा दंड

वाराणसी। प्रमुख संवाददाता

हर व्यक्ति को उसके कर्मानुसार ही दंड अथवा फल प्राप्त होता है। अश्वत्थामा के कर्म भी उसके साथ लगे रहे। कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ते। यह अश्वत्थामा के कर्मों का ही दंड है कि उसकी मस्तकमणि छिन गई और उसे टपकते हुए घाव के साथ सदा जीवित रहने का दंड मिला।

ये बातें श्रीमद्भागवत मर्मज्ञ डॉ. श्याम सुंदर पराशर ने 52वें सिय-पिय मिलन महामहोत्सव में गुरुवार को कथा सत्र में कहीं। उन्होंने कहा कि द्रौपदी को पता था कि श्रीकृष्ण के रहते उसका अहित नहीं हो सकता, लेकिन अपने पुत्रों की हत्या से वह व्यथित थी। इसी व्यथा में उसने अश्वत्थामा को शापित किया। इससे पूर्व पराशर महाराज ने भीष्म स्तुति और परीक्षित जन्म प्रसंग का वर्णन किया। इससके उपरांत सायंकाल रामलीला में भगवान के अवतार प्रयोजन और जय विजय प्रसंग की प्रस्तुति विशाल मंच पर की गई। लीला व्यास पं. नरहरिदास ने विशेष शैली में इन प्रसंगों को भक्तप्राण जनता तक पहुंचाया। इससे पूर्व प्रात:काल पांच से छह बजे तक मिथिला से आए लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक मंगल गीत गाए गये। दूसरे दिन के आयोजन में अशोक अग्रवाल, वेद प्रकाश अग्रवाल, राजेश मिश्रा, दीपक बजाज, संजय, कृष्ण कुमार खेमका, पवन बुधिया, ओम प्रकाश, श्रेयांश, मृदुल मिश्र आदि ने सक्रिय सहयोग किया।

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