कानपुरी ‘बशीर’ को बेहद पसंद थी बनारसी बोली

हिन्दुस्तान, वाराणसी
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डॉ. बशीर बद्र की शायरी ने दुनिया को दीवाना बनाया। कानपुर में पैदा हुए बशीर खुद बनारसी बोली और घाटों के दीवाने थे। उनका बनारस आना ऑल इंडिया मुशायरे के शुरुआती वर्षों से शुरू हुआ। उन्होंने बनारस की संस्कृति को बहुत पसंद किया और अपने बचपन के वाकये भी साझा किए।

कानपुरी ‘बशीर’ को बेहद पसंद थी बनारसी बोली

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बनारस के बेनियाबाग में होने वाले इंडो-पाक मुशायरे की कामयाबी की जमानत माने जाने वाले नायाब शायर डॉ.बशीर बद्र की शायरी ने दुनिया को दीवाना बनाया। कानपुर में पैदा हुए बशीर खुद बनारसी बोली ओर बनारस के घाटों के दीवाने थे। बेनियाबाग में ऑल इंडिया मुशायरे के शुरुआती सालों से उनका बनारस आना शुरू हुआ। यह सिलसिला उस मुशायरा के इंडो-पाक होने के बाद तक चलता रहा।

बनारस में पहला अनुभव

बनारस के छिपीटोला निवासी बुजुर्ग शायर हाफिज रईस बताते हैं कि बेनिया के मुशायरा में बड़े-बड़े शायरों को सुनकर सीखने की गरज से शायरों की खिदमत में लगा रहता था। करीब 60 साल पहले की बात है। बशीर साहब पहली बार आए थे। तब मुझे उनकी खिदमत का मौका मिला था। उन्होंने मुशायरा से पहले मुझसे बनारस घुमाने के लिए कहा। मैं उन्हें सीधा दशाश्वमेध घाट ले गया। घाट पर बनारसी बोली में लोगों की बातचीत का लहजा उन्हें बहुत पसंद आया। बनारस के घाटों से तो उन्हें पहली नजर में ही प्यार हो गया था। इसके बाद तो वह जब बनारस आए, मैं उनकी खिदमत में रहा।

1985 की यादें

मुझे वर्ष 1985 का एक जज़्बाती कर देने वाला वाकया याद आ रहा है। ठीक एक साल पहले वह मुशायरा में पाकिस्तान गए थे। उसी बीच उनकी पहली बेगम क़मर जहां का इंतकाल हो गया। तब हिंदू प्रशंसकों ने उनका अंतिम संस्कार बशीर साहब की गैरमौजूदगी में कराया था। गंगा किनारे बैठ कर इस वाकये को याद करते हुए बशीर साहब रो पड़े थे। उसी के अगले साल उन्होंने भोपाल की डॉ.राहत सुलतान से दूसरा निकाह किया था।

दोस्ती और यादें

मेरा उनके साथ कुछ ऐसा दोस्ताना हो गया था कि बनारस में घूमते समय वे अपने बचपन और पुलिस की नौकरी से जुड़े कई वाकये भी सुनाया करते थे। उन्होंने बताया था कि जब कक्षा सात में थे तब उनकी पहली ग़ज़ल नियाज फतहपुरी की पत्रिका ‘निगार’ में छपी थी। 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह देश की बड़ी पत्रिकाओं में छपने लगे। उन्होंने पुलिस की नौकरी करते हुए अपनी पढ़ाई सिरे से शुरू की जो वालिद के अचानक इंतकाल के कारण छूटी थी।

सामान्य प्रश्न

डॉ. बशीर बद्र का जन्म कहाँ हुआ?
डॉ. बशीर बद्र का जन्म कानपुर में हुआ।
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