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क्या आपके नमक में आयोडीन है? बिना जांचे परखे स्वास्थ्य विभाग कह रहा- हां

प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या आपके नमक में आयोडीन है? यह सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि आयोडीन की कमी से लोगों को कई बीमारियां हो रही हैं। इन पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार गांव-गांव में आयोडीन टेस्टिंग प्रोग्राम चला रही है। इसके तहत ब्लॉकवार गठित की गई स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर नमक में आयोडीन की मात्रा चेक कर रही है। टीम की रिपोर्ट हर माह जिला मुख्यालय से लखनऊ भेजी जा रही है। 

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने जांच रिपोर्ट की सत्यता जानने के लिए जब पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।  जिले के आठ ब्लॉकों में से छह के लोगों ने इस प्रकार के जांच के बारे में सुना ही नहीं है। जबकि उनके ब्लॉकों की जांच रिपोर्ट शत-प्रतिशत तैयार है। 

ऐसे की पड़ताल 
हिन्दुस्तान की टीम ने आठों ब्लॉकों के 80 गांवों का रेंडम सर्वे किया। जिसमें हर गांव से दस परिवार को सर्वे में शामिल कर उनसे जांच के बारे में पूछा गया। जिसमें 6 ब्लॉक के 60 गांव के सभी परिवारों पूर्व या मौजूदा समय में ऐसी किसी भी जांच से इनकार किया। 

इन गांवों में हो रही आयोडीन की जांच 
सेवापुरी के बाराडीह, कालिका बाजार, हरिभानपुर, ओदरहां, जगतीपुर, महराजपुर, वीरमपुर, बाराडीह, भूसौला, गैरहां, जगतीपुर, चोलापुर में धारसौना, बेला, मुरली, शहडीह, गरथौली, मठिया, दानगंज, छीत्तमपुर, कादीपुर, धैरहरा, लश्करपुर, हरहुआ में दासेपुर के लोगों ने आयोडीन जांच की बात कही। 

इसलिए जरूरी है आयोडीन
आयोडीन की कमी से खासतौर पर महिलाओं को घेंघा और थायराइड जैसी बीमारी शिकार बना रही है। घेंघा पर तो कुछ हद तक काबू पा लिया गया है लेकिन थायरायड के मरीज बढ़ रहे हैं। यह कहना है फेडरेशन ऑफ आब्स्टेट्रिक्स एण्ड गाइनकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की अध्यक्ष डॉ. जयदीप मेहरोत्रा का। डॉ. जयदीप ने बताया कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और बंगाल में इसके  मरीज ज्यादा हैं। ऐसे में अगर गर्भावस्था के दौरान शरीर में आयोडीन की कमी हुई तो बच्चा विकलांग या मंदबुद्धि पैदा हो सकता है। इसलिए नमक के प्रयोग में इसकी सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है कि आयोडीनयुक्त नमक की प्रयोग किया जाए।

प्रति नमूना 50 पैसे का मानदेय 
आयोडीन की जांच के लिए जिले की आशाओं को प्रतिमाह 50 नमूनों की जांच रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें प्रति नमूना उन्हें 50 पैसे की दर से मानदेय दिया जाता है। आयोडीन की मात्रा चेक करने के लिए आशाओं को साल्ट टेस्टिंग किट दिया गया है। उस किट के केमिकल की मदद से ये जांच की जाती है। नमक में केमिकल डालने पर उसका रंग हल्का नीला हो जाने पर उसे आयोडीनयुक्त माना जाता है। रंग न बदलने पर वह नमक आयोडीनरहित माना जाता है। इसके लिए तीन वर्ग तय किये गये हैं। शून्य पीपीएम में सबसे खराब कैटेगरी रखी जाती है। 15 पीपीएम से कम में आयोडीन की कुछ मात्रा होती है। वहीं 15 पीपीएम से ज्यादा वाले नमक को आयोडीन युक्त माना जाता है। 

आशाओं से मिली रिपोर्ट की ब्लॉक स्तर पर सुपरवाइजर से रेंडम जांच कराई जाती है। अगर जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की जा रही है तो मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी।  
डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ 

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  • Web Title:Does your salt have iodine