DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

DLW के निगमीकरण के प्रस्ताव का विरोध तेज, कर्मचारियों ने निकाला मार्च, बांटे परचे

डीरेका को निगम बनाने के प्रस्ताव के विरोध में दूसरे दिन कर्मचारियों ने कारखाने से मार्च निकाला। इसके पहले माथे और बाहों पर काली पट्टी बांधकर काम किया। कारखाने से दो किलोमीटर तक मार्च करते हुए कर्मचारी क्लब पहुंचे। लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें परचे बांटे। कर्मचारी क्लब के बाहर मैदान में आम सभा में कर्मचारी नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।

कहा कि अब तक सरकारी इकाइयों की निगमीकरण के बाद क्या स्थिति है, यह किसी से छिपा नहीं है। अगर डीरेका का भी निगमीकरण किया जाता है तो इन इकाइयों की तरह ही हालत होगी। यहां के कर्मचारियों का भविष्य अंधेरे में है। डीरेका बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक वीडी दुबे ने कहा कि डीरेका के विस्तारीकरण के शिलान्यास के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि निगमीकरण या निजीकरण नहीं किया जायेगा। बावजूद मंत्रालय की ओर से इस तरह का प्रस्ताव दिया जा रहा है। 

इसके पहले सुबह 7.30 बजे कारखाने के पूर्वी और पश्चिमी गेट पर निगमीकरण के विरोध में परचे बांटे गये। आम सभा में प्रमुख रूप से नवीन सिन्हा, विनोद सिंह, अजीमुल हक, आलोक वर्मा, राजेन्द्र पाल, कृष्ण मोहन, अरविन्द श्रीवास्तव, सुशील सिंह, राजेश, नरेंद्र मिश्रा, राधाबल्लभ, राकेश, अजय श्रीवास्तव, डीएन भट्ट, रंग बहादुर, अमित, जयप्रकाश आदि ने विचार रखे। संचालन कर्मचारी परिषद सदस्य प्रदीप यादव ने किया।

यह है रेलवे की तैयारी
वाराणसी के डीरेका समेत रेलवे की सात उत्पादन इकाइयों को निगम बनाने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड ने अगले 100 दिन के एक्शन प्लान में अपनी सभी उत्पादन इकाइयों को एक कंपनी के अधीन करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक सभी उत्पादन इकाइयां व्यक्तिगत लाभ केंद्र के रूप में काम करेंगी और भारतीय रेलवे की नई इकाई के सीएमडी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी।

मंत्रालय की ओर से 18 जून को लाये गये प्रस्ताव के मुताबिक अगले 100 दिनों में रेलवे की इन उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण के लिए गइराई से अध्ययन किया जायेगा। इन सात उत्पादन इकाइयों को भारतीय रेलवे की नई इकाई इंडियन रेलवे रोलिंग स्टॉक (रेल के डिब्बे एवं इंजन) कंपनी के अधीन लाया जायेगा। इस कंपनी का एक सीएमडी होगा। इस सीएमडी या कंपनी के बोर्ड को उत्पादन इकाइयां अपनी रिपोर्ट देंगी। उत्पादन इकाइयां अपने सीईओ यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अधीन होंगी। 

सभी उत्पादन इकाइयां व्यक्तिगत लाभ के केंद्र के रूप में काम करेंगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे इकाइयों और भारतीय रेलवे दोनों को फायदा होगा। साथ ही निर्यात और बेहतर परिचालन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। निगमीकरण के लिए रेलवे कर्मचारी संगठनों से भी बात की जाएगी। इसके बाद सबसे पहले रायबरेली के माडर्न कोच फैक्ट्री का निगमीकरण किया जायेगा। 

यह उत्पादन इकाइयां बनेंगी निगम
चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स आसनसोल
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई
डीजल रेल इंजन कारखाना वाराणसी
डीजल माडर्नाइजेशन वर्क्स पटियाला
ह्वील एंड एक्सल प्लांट बेंगलुरु
रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला
माडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:DLW opposes proposals for fast employees leave March