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29 अक्तूबर, 2020|4:26|IST

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दमघोंटू हुई हवाः मंगलवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा वाराणसी, टूटी सड़कें हैं बड़ा कारण

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनीटरिंग में मंगलवार को वाराणसी शहर को देश का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया। नमी और धूल के कारण यहां प्रदूषण बढ़ा है। खास यह कि सोमवार की रात 12 से सुबह चार बजे और सुबह आठ से दोपहर 12 बजे के बीच पीएम 2.5 व पीएम 10 की घनत्व प्रति मीटर 300 के पार रहा। इसके पीछे वाराणसी की टूटी सड़के बड़ा कारण हैं।

बादल व वातावरण में नमी के कारण प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के अनुसार प्रति घन मीटर पीएम 2.5 और पीएम 10 की औसत मात्रा क्रमश: 243 और 227 तक रही लेकिन अलग-अलग समय पर इनका घनत्व खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा रात 12 से सुबह चार बजे तक, फिर सुबह आठ से दोपहर 12 बजे के बीच बढ़ी है।

रात में नमी और ट्रकों के आवागमन से प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। मंगलवार को पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा अलग-अलग समय पर क्रमश: 359 और 369 तक पहुंच गई थी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कालिका सिंह ने विकास कार्य में बरती जा रही जरूरी सावधानियों का पालन न होने को भी कारण बताया। बता दें कि मंगलवार को लखनऊ दूसरा और मुजफ्फरनगर तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा।

टूटी सड़कें प्रदूषण का बड़ा कारण
वाराणसी शहर में वायु प्रदूषण पिछले कुछ दिनों से तेजी से बढ़ने लगा है। पिछले एक सप्ताह में इसमें काफी बढ़ोतरी हो गई है। इसका कारण शहर की सड़कों की खुदाई के चलते उड़ रही धूल और जगह-जगह निर्माण कार्य हैं। प्रति घन मीटर पीएम 2.5 और पीए 10 की मात्रा तेजी से बढ़ी है। अमूमन हर दिन इनकी मात्रा काफी अधिक बढ़ रही है। पिछले छह दिन का आंकड़ा देखें तो 16 अक्तूबर को पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 331 तक पहुंच गई थी, 13 अक्तूबर को पीए 10 की मात्रा 319 तक पहुंच गई थी विशेषज्ञों के अनुसार, धूल-धुआं कम न हुआ तो तापमान गिरने के साथ प्रदूषण बढ़ता जायेगा।

पिछले हफ्ते की स्थिति
तारीख        पीएम2.5    पीएम10
17 अक्तूबर        314        248
16 अक्तूबर        331        291
15 अक्तूबर        310        310
14 अक्तूबर        293        272
13 अक्तूबर        321        319
12 अक्तूबर        296        258

ये हैं प्रमुख कारण 
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि बदहाल सड़कें और जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्य में जरूरी सावधानियों का पालन न करना प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। दिन में झाड़ू लगाने से भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है।

सुझाए उपाय--
- सड़कों पर उड़ती धूल को कम करने के लिए पानी का छिड़काव
- सड़क मरम्मत या अन्य कोई भी निर्माण हरे कपड़े से घेरकर कराया जाय।
- सड़कों के गड्ढों में भरी गई मिट्टी या गिट्टी को सही तरीके से दबाया जाय। 
- दिन निकलने के पहले ही सड़कों पर झाड़ू लगा देना चाहिए।

400 के पार जाते ही खतरनाक स्थिति
पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 400 के पार पहुंचते ही प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जायेगा। 0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब, 401 से 500 तक खतरनाक स्तर। यानी इसमें स्वस्थ व्यक्ति भी कई तरह की बीमारियों से घिर सकता है। 

पीएम 2.5 और पीएम 10
हवा में मौजूद इतने छोटे कण होते हैं, जो स्वस्थ आदमी को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इन कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, अस्थमा का अटैक जैसी परेशानी बढ़ती है। इसमें महीन धूल के कण, धातु व श्वांसरोधी गैस के अवयव होते हैं।

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  • Web Title:Damagontu air Varanasi remains the most polluted city in the country on Tuesday broken roads are the major reason