काशी और नेपाल का सांस्‍कृतिक संबंध अटूट: स्‍वामी शंकरपुरी

Feb 14, 2026 01:50 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में 'काशी-नेपाल शास्‍त्र संगमम्' का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि स्वामी शंकर पुरी ने काशी और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा की। संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने दोनों देशों के संबंधों की महत्ता को रेखांकित किया। नेपाल के प्रो. केशव शरण अर्याल ने काशी की शास्‍त्रीय परम्‍परा में योगदान बताया।

काशी और नेपाल का सांस्‍कृतिक संबंध अटूट: स्‍वामी शंकरपुरी

वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में शुक्रवार को दो दिवसीय ‘काशी-नेपाल शास्‍त्र संगमम्’ का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत स्वामी शंकर पुरी ने कहा कि काशी और नेपाल के सांस्कृतिक संबंध अटूट हैं। उन्होंने काशी और नेपाल के तीर्थों और धार्मिक स्थलों की चर्चा की। अध्‍यक्षता करते हुए संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्‍ल ने भारत एवं नेपाल के भौगोलिक, सांस्‍कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं पारिवारिक सम्‍बन्‍धों की प्राचीनता, दृढ़ता एवं महत्ता पर प्रकाश डाला। विशिष्‍ट अतिथि नेपाल संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय के प्रो. केशव शरण अर्याल ने नेपाल की शास्‍त्रीय परम्‍परा में काशी के योगदान की चर्चा की।

उन्होंने बताया कि आज भी नेपाल में यह लोकोक्ति प्रचलित है कि ‘'विद्या हराए काशी जानू, न्‍याय नपाए गोरखा जानू’। सारस्‍वत अतिथि सम्‍पूर्णानन्‍द संस्‍कृत विवि के प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने बताया कि आज भी नेपाल में संकल्‍प में कहा जाता है ‘'भारतवर्षे आर्यावर्त्तैकदेशान्‍तर्गते नेपालदेशे’ अर्थात् भारतवर्ष व आयावर्त के अन्‍तर्गत ही नेपाल भी है। संचालन प्रो. ब्रजभूषण ओझा और धन्‍यवाद ज्ञापन डॉ. नारायण प्रसाद भट्टराई ने किया। उद्घाटन सत्र में प्रो. हृदयरंजन शर्मा, प्रो. कृष्‍णकान्‍त शर्मा, प्रो. कमलेश कुमार जैन, प्रो. हरीश्‍वर दीक्षित, प्रो. धनंजय कुमार पाण्‍डेय, प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. शीतला प्रसाद पांडेय, प्रो. शत्रुघ्‍न त्रिपाठी, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. पतंजलि मिश्र, प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, प्रो. शशिकान्‍त द्विवेदी, प्रो. शैलेश कुमार तिवारी, डॉ. सुभाष पांडेय, डॉ. श्रीराम ए.एस., डॉ. रामेश्‍वर शर्मा, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. राहुल मिश्र आदि विद्वान मौजूद रहे।

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