Varanasi News: सावन से पहले काशी पहुंचा सावनी एहसास
Varanasi News: धर्म संस्कृति पेज पर प्रस्तावित लीड नाद यात्रा प्रो. ऋचा कुमार ने

Varanasi News: वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मनभावन सावन आने को है लेकिन उसके आने से पहले सावनी एहसास शुक्रवार को काशी पहुंच गया। इस एहसास का आधार ‘नाद यात्रा’ बनी। प्रो. ऋचा कुमार की रागमाला में सजे कजरी के फूलों की खुशबू पंख लगाकर उड़ी। रागों के सधे स्वर-घन से बरसी रसधार में श्रोताओं का अंतरमन भीग उठा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के करौंदी स्थित सभागार में शुक्रवार को संस्कार भारती की मासिक गोष्ठी में लोकसंगीत की झूला और कजरी जैसी विधाएं शास्त्रीय शृंगार कर श्रोताओं तक पहुंचाई गईं। सावन से पहले सावनी एहसास के लिए इतना काफी था। प्रो. ऋचा ने गायन की शुरुआत झूला से की। ऋतु आधारित राग में ‘धीरे से झुलावो बनवारी हर सांवरिया..’ में श्रोताओं ने झूला का हर भाव साकार होता महसूस किया। दादरा ‘नजर भर हेरो घूंघट वाली रे...’ से गायन आगे बढ़ाते हुए उन्होंने एक के बाद एक अंदाज वाली कजरी सुनाई। मिर्जापुरी कजरी ‘गोरिया पाई नाहीं सइया के सवनवा में...’, बनारसी कजरी ‘सावन झरे लागेला धीरे धीरे...’ आजमगढ़ी कजरी ‘सावन भदउवा के निसी अंधरियी...’, छपरा की कजरी ‘सावन भदहुआ क बरसै ल पनिया...’ के बाद वृंदावनी कजरी ‘ठाढ़े जमुना के तीर बा कृष्ण हरीर...’ से गायन को विराम दिया। तबला पर पं. ललित कुमार की सधी हुई संगत ने गायन को और भी भावपूर्ण बना दिया। हारमोनिय पर संगत हर्षित उपाध्याय ने की। इससे पूर्व युवा गायक भगीरथ जालान ने गणेश वंदना से गायन का आरंभ किया। उन्होंने ठुमरी ‘रोक ना डगर मोरे श्याम मैं तो जात अपनी धाम...’ के बाद कजरी ‘बरसन लागि बदरिया रूम झूम के...’ का भावपूर्ण गायन किया。
संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं
पूर्व सत्र में विषय विशेषज्ञ बीएचयू की डॉ. आनंदिता तिवारी ने संगीत की परंपरा और इसके सांस्कृतिक महत्ता पर व्याख्या दिया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह आत्मा को ब्रह्मानंद प्राप्त कराता है। मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता है। जब तक संगीत है, तब तक संवेदना है।
दीप प्रज्जवलन से हुआ शुभारंभ
इससे पूर्व मुख्य अतिथि नागरी नाटक मंडली ट्रस्ट के सचिव डॉ. अजीत सैगल ने दीप जलाकर संगीत गोष्ठी का शुभारंभ किया। अतिथियों और कलाकारों का स्वागत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की क्षेत्रीय इकाई के प्रभारी डॉ. अभिजित दीक्षित ने किया। उन्होंने बताया कि मासिक संगीत गोष्ठी शृंखला नाद यात्रा का यह 51वां आयोजन है। इस अवसर पर किशन जालान, श्यामकृष्ण अग्रवाल, डॉ. प्रेम नारायण सिंह, डॉ. अवधेश सिंह, दीपक शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संचालन प्रो. कुमार अम्बरीश चंचल और धन्यवाद डॉ. आरवी शर्मा ने किया।
आवश्यक : सावन में 10 जगह हेल्प डेस्क का सुझाव
- सावन में भीड़ प्रबंधन एवं सुविधा के मद्देनजर सुझाए उपाय
- समाजसेवी ने स्कूल संचालन के समय में बदलाव को कहा
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। सावन में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए समाजसेवी सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. रमेशदत्त पांडेय ने प्रशासन को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें 10 प्रमुख जगहों पर हेल्प डेस्क स्थापित कर वहां बहुभाषी पुलिसकर्मियों की तैनाती का सुझाव प्रमुख है।
डॉ. पांडेय ने मैदागिन, गोदौलिया, चौक, लक्सा, मणिकर्णिका, मंदिर गेट, सोनारपुरा, गिरजाघर चौराहा, मारवाड़ी सेवा संघ, लक्सा थाना के पास हेल्प डेस्क बनाकर तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, गुजराती सहित विभिन्न भाषाएं जानने वाले पुलिकर्मियों को तैनात करने का सुझाव दिया है। साथ ही प्राथमिक और उच्च कक्षाओं की पढ़ाई के समय में बदलाव, सोमवार को विद्यालय बंद रखकर रविवार को कक्षाएं संचालित कराने की बात कही है।
उनके सुझावों में धर्मशालाओं, होटलों, गेस्ट हाउस और आश्रमों में ठहरने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को कलाई पट्टी जारी करने की भी बात है। कलाई पट्टी पर संबंधित आश्रय स्थल और श्रद्धालु के नाम, मोबाइल नंबर अंकित हों ताकि उनके भटकने पर उन्हें सकुशल पहुंचाया जा सके। वृद्ध, दिव्यांग और बीमार श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर, गोल्फ कार्ट, मारवाड़ी अस्पताल परिसर में 24 घंटे चिकित्सकीय सेवाओं के संचालन पर जोर दिया गया है। पेयजल, भंडारा, स्वच्छ शौचालय, चेंजिंग रूम, नियमित सफाई, निर्बाध बिजली आपूर्ति, एलईडी स्क्रीन, सुरक्षित लॉकर, पार्किंग की डिजिटल सूचना, फॉगिंग, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, जल पुलिस, गोताखोर और खोजी कुत्तों की तैनाती जैसे सुझाव भी दिए हैं।


