Varanasi News: दालमंडी में भवन पर बुलडोजर चलाने से हाईकोर्ट नाराज
Varanasi News: प्रयागराज में जावेद आलम के भवन पर बुलडोजर कार्रवाई से हाईकोर्ट नाराज है। अदालत ने नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए। याची ने अवमानना याचिका में दावा किया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उनका भवन ढहा दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

Varanasi News: प्रयागराज, विधि संवाददाता। दालमंडी इलाके में जावेद आलम के भवन पर बुलडोजर कार्रवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट नाराज है। अदालत ने नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल भी उठाए। न्यायमूर्ति विकास ने बुधवार को तीन अधिकारियों के हलफनामे देखें। इसके बाद उन्होंने याची को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को दोपहर दो बजे होगी।
अवमानना याचिका
दालमंडी निवासी याची जावेद आलम ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। आरोप लगाया कि अदालत के सात मई, 2026 के आदेश के बावजूद 11 जून को उनका भवन बुलडोजर से ढहा दिया गया। उन्होंने एक जून को सक्षम अधिकारी के समक्ष आपत्ति दाखिल की थी। उस पर कोई निर्णय नहीं किया गया और उनकी संपत्ति जमींदोज कर दी गई। बता दें कि हाईकोर्ट के सात मई के आदेश में नगर निगम को नया निरीक्षण दल गठित करने के लिए कहा गया था। इसमें स्वतंत्र वास्तुकार, कार्यकारी अभियंता और राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग के कार्यकारी अभियंता को शामिल करने का निर्देश दिया गया था। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर धारा 331 के तहत नोटिस जारी करने और याची के जवाब के बाद कार्रवाई करने के लिए कहा था। इस दरम्यान संबंधित भवन की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था।
नगर निगम का हलफनामा
उधर, नगर निगम के हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि उसने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में समिति गठित की थी। निरीक्षण में याची का भवन जर्जर स्थिति में मिला। हालांकि उसने कहा कि 11 जून को भवन पर बुलडोजर की कार्रवाई किसी दूसरे विभाग ने की। इस बीच, संबंधित अधिकारी ने हलफनामे में स्वीकार किया कि 11 जून को वह पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद थे। उनकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की थी। सड़क चौड़ीकरण के लिए जावेद अहमद का भवन पीडब्ल्यूडी ने ढहाया था। एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि याची का भवन जर्जर था। वह स्वयं ढह गया।
अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि तीनों अधिकारियोंके हलफनामों में जावेद अहमद के भवन पर बुलडोजर कार्रवाई से इनकार किया गया है। बावजूद इसके 11 जून को मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी और भवन के ध्वस्तीकरण की बात उनके हलफनामे में आ रही है। कोर्ट ने इसे विरोधाभासी और आश्चर्यजनक स्थिति माना। उसने याची को तीनों हलफनामों पर जवाब देने का निर्देश दिया।


