नमो घाट पर डूब रहे दंपति एवं भतीजे को बचाया

Newswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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वाराणसी में नमो घाट पर रविवार रात एक दंपति और उनके भतीजे की जान बचाई गई। गंगा में डूबते समय नाविकों और अन्य लोगों ने उन्हें बाहर निकाला। घाट पर गहराई अधिक होने के कारण पुलिस ने आगाह किया है कि लोग यहां स्नान के लिए न आएं।

नमो घाट पर डूब रहे दंपति एवं भतीजे को बचाया

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। नमो घाट पर नाविकों के प्रयास से रविवार रात दंपति और उनके भतीजे की जान बच गई। सूचना पर पहुंची आदमपुर पुलिस ने लोगों को समझाया कि नमो घाट पर गंगा की ओर जाना खतरनाक है। नीचे गहराई अधिक है, इसलिए न जाएं। नमो घाट चौकी प्रभारी चंदन कुमार ने बताया कि लालपुर, गीता रेडियो के पास के सतीश कुशवाहा अपनी पत्नी शिवांगी और भतीजे के साथ नमो घाट घूमने आए थे। घाट पर बड़े वाले नमस्कार मुद्रा की प्रतिकृति के ठीक सामने सतीश गंगा में हाथ-मुंह धोने चले गए। वह पैर फिसलने से गंगा में डूबने लगे। उन्हें बचाने गईं उनकी पत्नी शिवांगी भी डूबने लगीं। दोनों को बचाने गया भतीजे की भी जान पर बन आई। तब तक नाविकों और दूसरे लोगों की नजर पड़ी तो उन्होंने तीनों को खींचकर बाहर निकाला。

नमो घाट किनारे पांच से 10 फुट गहराई

वाराणसी। आदमपुर इंस्पेक्टर विमल मिश्रा ने बताया कि नमो घाट और इसके आसपास निर्माण के कारण कहीं कहीं गंगा में प्रवेश करते ही पांच से 10 फुट की गहराई है। इसी कारण किनारे जाने से भी बचना चाहिए। लोगों को आगाह करने के लिए किनारे चेतावनी बोर्ड भी लगाया जाएगा। ताकि इस तरह की दूसरी घटना ना हो।

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स्नान घाट नहीं, नहाने के लिए न आएं

नमो घाट पर स्नान के लिए कोई जगह नहीं है। स्नान घाट न होने के कारण सुरक्षित नहीं है। घाट के निर्माण के समय खुदाई के कारण जगह जगह ज्यादा गहराई है। इसलिए यहां गंगा में जाना खतरनाक है।

सामान्य प्रश्न

नमो घाट पर यह घटना कब हुई?
यह घटना रविवार रात को हुई।

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