Hindi NewsUttar-pradesh NewsVaranasi NewsChennai Teacher K L Vikas to Create Art Series with Ganga Water from Kashi
काशी के गंगाजल से आकार लेगा तेनकाशी विश्वनाथ मंदिर

काशी के गंगाजल से आकार लेगा तेनकाशी विश्वनाथ मंदिर

संक्षेप:

Varanasi News - वाराणसी में काशी तमिल संगमम् में भाग लेने आए शिक्षक केएल. विकास ने काशी के गंगाजल से शिव मंदिरों की चित्र शृंखला बनाने का संकल्प लिया है। वे तेनकाशी के विश्वनाथ मंदिर के चित्र से शुरुआत करेंगे। काशी में आने का उनका सपना बचपन से था, और उन्होंने गंगाजल लेकर रामनाथस्वामी को अर्पित करने की योजना बनाई है।

Dec 06, 2025 02:55 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
share Share
Follow Us on

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी तमिल संगमम् में भाग लेने आए चेन्नई के शिक्षक केएल. विकास ने काशी में अनूठा संकल्प किया है। वह काशी के गंगाजल से उत्तर और दक्षिण भारत के प्रख्यात शिव मंदिरों की चित्र शृंखला तैयार करेंगे। इसकी शुरुआत वह दक्षिण भारत स्थित तेनकाशी के विश्वनाथ मंदिर के चित्र से करेंगे। आप के अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष बातचीत में केएल विकास ने कहा कि काशी आना उनका बचपन से सपना रहा है। पढ़ाई लिखाई के दौरान और उसके बाद बतौर शिक्षक कॅरियर शुरू करने के बाद भी कई ऐसे अवसर आए जब उन्हें लगा कि वह काशी पहुंच जाएंगे लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

इसी वर्ष फरवरी में हुए काशी तमिल संगमम् के तीसरे संस्करण में भी उन्हें आने का अवसर मिला था लेकिन अचानक अस्वस्थ हो जाने से संभव नहीं हो सका। इस बात का उन्हें मलाल तो था ही लेकिन यह विश्वास भी था कि जल्द ही उन्हें अवसर मिलेगा। इसी वर्ष यह समय आ गया। उन्होंने बताया कि जब काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर रहा था उसी समय मन में भाव जागृत हुआ कि कुछ ऐसा करना चाहिए जो दोनों संस्कृतियों के एकात्म स्वरूप का दर्शन कराए। इसके लिए चित्रकारी से बेहतर और क्या हो सकता था। मैंने उसी क्षण तय कर लिया कि काशी के गंगाजल में रंग मिलाकर एक ऐसी चित्र शृंखला तैयार करूंगा जो उत्तर और दक्षिण भारत के प्रमुख शिवमंदिरों पर केंद्रित होगी। तमिलनाडु राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित केएल विकास ने बताया कि काशी से वापसी के समय वह अपने साथ पांच लीटर गंगाजल ले जाएंगे। यह गंगाजल वह पहले रामनाथस्वामी (रामेश्वर महादेव) को अर्पित करेंगे। ऐसा करने से काशी से गंगाजल बाहर ले जाने के दोष से वह मुक्त हो जाएंगे। रामनाथस्वामी को अर्पित करने के बाद उसी गंगा जल में रंग घोलकर वह अपनी चित्र शृंखला आरंभ करेंगे।