‘ऋतु रंग’ में उतर आया गंवई परिवेश, विभूतियों का सम्मान

Newswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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Varanasi News - वाराणसी में 'ऋतु रंग' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मौसम परिवर्तन के साथ जीवन की खुशियों और परंपराओं का उत्सव मनाया गया। दुर्गाकुंड के संजय शिक्षा निकेतन में ग्रामीण परिवेश का अनुभव कराया गया। कार्यक्रम में अतिथियों को सम्मानित किया गया और पारंपरिक व्यंजन बाटी-चोखा का आनंद लिया गया।

‘ऋतु रंग’ में उतर आया गंवई परिवेश, विभूतियों का सम्मान

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। ऋतुएं केवल मौसम का परिवर्तन नहीं बल्कि जीवन के रंगों का उत्सव लेकर आती हैं। इन्हीं रंगों, भावनाओं और परंपराओं का जीवंत रूप ‘ऋतु रंग’ में नजर आया। यह मात्र एक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश की माटी की सोंधी खुशबू, किसानों की मेहनत, उनके सपनों और उनकी खुशियों का सांकेतिक उत्सव के रूप में सजा।शिव बारात समिति की ओर से दुर्गाकुंड स्थित संजय शिक्षा निकेतन में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण परिवेश आयोजन स्थल पर उपस्थित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मंच को छोड़ कर आयोजन स्थल के अन्य हिस्से ग्रामीण परिवेश की अनुभूति कराते नजर आए। गंवई झलक वाले गाने-बजाने के बाद खान-पान भी वैसा ही रहा।

ऋतु रंग में सम्मिलित सभी अतिथियों ने बाटी-चोखा और खीर का जमकर लुत्फ उठाया। कार्यक्रम संयोजक दिलीप सिंह ने बताया कि इस अवसर पर नगर की विशिष्ट विभूतियों का सम्मान भी किया गया। सम्मानित किए जाने वालों में सितारवादक पद्मश्री पं.शिवनाथ मिश्र, वरिष्ठ सांस्कृतिक समीक्षक पं.अमिताभ भट्टाचार्य, गीता प्रेस के संपादक कृष्ण कुमार खेमका शामिल हैं।

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