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वाराणसी

छह एंबुलेंस चालकों पर केस, सात बर्खास्त

हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीPublished By: Newswrap
Thu, 29 Jul 2021 03:32 AM
छह एंबुलेंस चालकों पर केस, सात बर्खास्त

वाराणसी। कार्यालय संवाददाता

हड़ताल एंबुलेंस चालकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। कार्यदायी संस्था जीवीके के प्रोग्राम मैनेजर अभिषेक श्रीवास्तव की तहरीर पर रामनगर थाने में छह चालकों व ईएमटी पायलट और करीब 250 अज्ञात पर केस दर्ज किया गया है। सात एम्बुलेंस चालकों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसमें छह वे हैं जिनपर नामजद मुकदमा दर्ज है वहीं एक अन्य चालक दीपक सिंह चौहान है।

अभिषेक की तहरीर पर जीवनदायनी संघ के जिलाध्यक्ष कौशाम्बी निवासी सुनील कुमार शुक्ला, चंदौली निवासी अजित सिंह यादव, जौनपुर निवासी श्याम सिंह यादव, वाराणसी के कमलेश कुमार सिंह, पारसनाथ व बलिया निवासी हीरालाल व अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की एस्मा एक्ट के तहत धारा 188, 269, 270 व 3/4 महामारी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। कंपनी ने प्रोग्राम मैनेजर ने बताया कि एस्मा के तहत धरना प्रदर्शन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद एंबुलेंस चालक धरनारत है।

कपड़े उतार कर प्रदर्शन, सपा का समर्थन

रामनगर स्थित रामनगर दुर्गा मंदिर के समीप रामलीला मैदान में चल रहा एम्बुलेंस चालकों का धरना तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। मुकदमे और बर्खास्तगी की कार्रवाई से आक्रोशित चालकों ने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया। प्रदेश सरकार और कार्यदायी संस्था के विरोध में नारे लगाए और बर्तन पीटकर विरोध जताया। गुरुवार को एम्बुलेंस चालक लखनऊ जाकर वहां विरोध करेंगे। वहीं सपा कार्यकर्ताओं ने नगर अध्यक्ष जितेंद्र यादव मलिक के नेतृत्व में एम्बुलेन्स चालको की मांगो को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया। सपा कार्यकर्ताओं ने चालकों के साथ धरने में शामिल होकर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। इनमें संजय यादव, दिलदार खान, इंजम्मुल खान, सुजीत गुप्ता, रामबाबू सोनकर, छेदी सोनकर आदि रहे ।

एंबुलेंस की चाभी के लिए नोकझोंक

सीएमओ डॉ. वीबी सिंह बुधवार दोपहर एम्बुलेंस चालकों को मनाने रामनगर धरनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि आप चाभी जमा कर दीजिए लेकिन हड़ताली नहीं माने। बाद में एडिशनल सीएमओ डॉ. प्रसाद भी पहुंचे और उन्होंने चाभी मांगी तो हड़ताली नोकझोंक करने लगे। स्थिति यह हो गई कि भारी संख्या में पुलिस बुलानी पड़ी। हालांकि बाद में वे चाभी देने को तैयार हो गए। सीएमओ से आफिस से अतिरिक्त चालकों चाभी देकर सेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

कंपनी बदलने के बाद नौकरी पर खतरा

एम्बुलेंस चालको का कहना था कि प्रदेश सरकार ने पूर्व में जीवीके कंपनी को एम्बुलेंस संचालन की जिम्मेदारी दे रखी थी जिसे अब जेडएचएल को दे दिया गया है। जेडएचएल महज 10,500 रुपये दे रही है जबकि पूर्व में 13700 रुपये मिलते थे। यह कंपनी 25 हजार की डीडी भी जमा करा रही है। चालको का कहना था कि कम्पनी बदलने से हमारी पूर्व के जमा रुपये भी नही मिल रहे हैं। नई कंपनी ने एम्बुलेंस की एडवांस लाइफ सपोर्ट की गाड़ियों को ठेके से बाहर कर दिया है जिससे कई लोग बेरोजगार हो गए।

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