Varanasi News: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में संशोधन कराने में छूटते हैं पसीने

हिन्दुस्तान, वाराणसी
Follow us on Google News
share

Varanasi News: वाराणसी में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र में संशोधन कराने में लोगों को पसीने छूट रहे हैं। नियमों और कार्यालयों के कारण फाइलें लौटाई जा रही हैं। नगर निगम में रोजाना 80-100 आवेदन आते हैं, लेकिन प्रक्रिया धीमी होने से लगभग 2600 प्रमाण पत्र लंबित हैं। पोर्टल की धीमी चाल भी समस्या को और बढ़ा रही है।

Varanasi News: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में संशोधन कराने में छूटते हैं पसीने

Varanasi News: वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र में संशोधन कराने में लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं। नियम-कानून कुछ दिक्कत खड़ी कर रहे हैं तो सीएमओ दफ्तर से लौटाई जा रहीं फाइलें उनका सिरदर्द बन चुकी हैं। संशोधित प्रमाणपत्र के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है। पहले मुख्यालय से नगर निगम को जारी एक आईडी से पांच कम्प्यूटर चलते थे। अब एक आईडी से सिर्फ एक कम्प्यूटर चलता है। ऐसे में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में संशोधन में बहुत समय लगता है। यही वजह है कि लंबित प्रमाण पत्रों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र में नाम, शब्दों की वर्तनी (स्पेलिंग) और पते में संशोधन के लिए नगर निगम में आवेदन किया जाता है। जन्म प्रमाण पत्र में माता-पिता के आधार कार्ड, आवेदन पत्र और शुल्क जमा करने के बाद भी आवेदकों को चक्कर लगाना पड़ता है। किसी तरह फाइल स्वास्थ्य विभाग पहुंचती है तो सीएमओ दफ्तर हलफनामे का अड़ंगा लगाकर उसे लटका देता है। पिछले सप्ताह करीब 400 फाइलें नगर निगम को लौटाई गईं।

नगर निगम का बयान

उधर, नगर निगम प्रशासन का कहना है कि रजिस्टर में दर्ज तथ्यों के आधार पर नाम और पते में संशोधन करके फाइल स्वास्थ्य विभाग के पास भेजी जाती है। ऐसे में हलफनामा मांगने का कोई औचित्य नहीं है। बता दें कि नगर निगम मुख्यालय में रोजाना 80-100 आवेदन आते हैं लेकिन प्रक्रिया धीमी होने से सोमवार तक करीब 2600 प्रमाण पत्र लंबित हो गये। रजिस्टर में दर्ज होने पर प्रमाण पत्र में संशोधन में अधिकतम एक हफ्ते लगता है लेकिन अभी यह समय एक महीने से अधिक हो गया है।

पोर्टल की धीमी चाल से समस्या

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में संशोधन कराने में पोर्टल की धीमी चाल बड़ी बाधा है। सोमवार को दिनभर पोर्टल नहीं चला जिससे आवेदक परेशान रहे। इसके कारण नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ उनकी नोकझोंक होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लंबित प्रमाण पत्रों की संख्या कितनी है?
लंबित प्रमाण पत्रों की संख्या सोमवार तक करीब 2600 हो गई है।
Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।