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बौद्ध धर्म समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रतीक

बौद्ध धर्म प्राचीन भारत में उत्पन्न एक समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रतीक है। गौतम बुद्ध ने दुख की प्रकृति को समझने और मुक्ति का मार्ग खोजने की कोशिश...

बौद्ध धर्म समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रतीक
हिन्दुस्तान टीम,वाराणसीMon, 27 May 2024 12:30 AM
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वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बौद्ध धर्म प्राचीन भारत में उत्पन्न एक समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रतीक है। गौतम बुद्ध ने दुख की प्रकृति को समझने और मुक्ति का मार्ग खोजने की कोशिश की। बौद्ध ज्ञान के केंद्र में चार आर्य सत्य की अवधारणा है।
ये बातें केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षण संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहीं। वह संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में आयोजित ‘बौद्ध धर्म दर्शन में निहित ज्ञान परंपरा विषयक संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर कहे थे। धम्मालर्निंग सेंटर सारनाथ के संस्थापक अध्यक्ष भदंत चंदिमा थेरो ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि बौद्ध परंपरा में नैतिकता, ध्यान और ज्ञान सहित विभिन्न अनुशासन भी शामिल हैं। नैतिक आचरण (शील) आध्यात्मिक विकास के लिए आधार देता है, जबकि ध्यान (समाधि) मानसिक स्पष्टता और ध्यान केंद्रित करता है। बुद्धि (प्रज्ञा) इस प्रक्रिया की परिणति है जो व्यक्ति को चीजों को वैसा ही देखने में सक्षम बनाती है जैसी वह वास्तव में हैं।

विशिष्ट अतिथि श्रमण विद्या संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हरप्रसाद दीक्षित ने कहा कि बौद्ध धर्म की ज्ञान परंपरा केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि बौद्ध धर्म की ज्ञान परंपरा एक गहन और कालातीत ज्ञान प्रदान करती है। संगोष्ठी के संयोजक पालि विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद ने विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम में प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. जितेन्द्र कुमार सिंह, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो.शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. विजय कुमार पाण्डेय, प्रो. हरिशंकर पाण्डेय, प्रो.हरिप्रसाद अधिकारी आदि थे।

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