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वाराणसी में 100 साल पुराने जर्जर रेल पुल को 5 घंटे 55 मिनट में तोड़कर फिर से बना दिया

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रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने शुक्रवार को एक बार फिर अपने कार्य कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। वाराणसी हावड़ा रूट पर 100  साल पुराने जर्जर पुल को छह घंटे से भी कम समय में तोड़कर फिर से नया बना दिया। रेलवे की कोशिश थी कि इस रूट पर ज्यादा लंबा ब्लाक लेकर ट्रेनों को ज्यादा देर न रोका जाए अौर भीषण गर्मी में यात्रियों को कोई परेशानी न हो। अपनी कोशिश में वह सफल भी हुए। आठ घंटे का ब्लाक लिया लेकिन छह घंटे से भी कम समय में काम पूरा कर दिया। 

वाराणसी के काशी स्टेशन अौर दीनदयाल जंक्शन के बीच है पुल

काशी स्टेशन अौर पं. दीनदयालनगर जंक्शन के बीच पड़ने वाले व्यासनगर स्टेशन के पास करीब 100 साल पुराना जर्जर पुल था। इसके जर्जर होने के कारण वाराणसी से हावड़ा अौर दिल्ली से हावड़ा जाने वाली ट्रेनों को इस पुल पर केवल 10 किलोमीटर की स्पीड से ही गुजरने की इजाजत थी। कई साल से यहां स्पीड का काशन लगा हुआ है। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी में भी इजाफा होता था। इसे देखते हुए करीब दो दशक पहले पुल की मरम्मत की योजना बनी। 12 साल पहले पुल बनाने की मंजूरी भी मिल गई लेकिन कई कारणों से काम कभी नहीं शुरू हो सका। 

50 से अधिक कर्मचारियों ने शुरू किया काम, पुल तोड़ा, बनाया, पटरी भी बिछा दी

पुल को तोड़कर बनाने की इजाजत मिलते ही लखनऊ अौर वाराणसी मंडल की इंजीनियरिंग विभाग की टीमों ने इस रूट की व्यस्तता को देखते हुए कम से कम समय में पुल तैयार करने का प्लान बनाया। एक तरफ से ही पुल को तोड़ने अौर बनाने की दिक्कत होने के बाद भी प्लान के अनुसार 50 से ज्यादा तेजतर्रार कर्माचारियों की टीम तैयार की गई। एक पोकलेन, तीन जेसीबी अौर दो क्रेनों को मंगाकर निश्चित स्थान पर खड़ा कर दिया गया। योजना के अनुसार ब्लाक लेकर शुक्रवार की सुबह 11.30 बजे काम शुरू हुआ। अप और डाउन रेल पटरी हटाकर पुराने पुल को तोड़ा गया। इसके बाद बेस तैयार किया गया। 11 मीटर लंबाई में चार आरसीसी बॉक्स डाले गये। बॉक्स के आसपास कंक्रीट व मिट्टी डाली गई। फिर से अप और डाउन लाइन की पटरी बिछाई गई। इसके लकड़ी के स्लीपर भी बदले गये। यह अंतिम पुल है, जिससे अब जाकर लकड़ी के स्लीपर हटाये गये। शाम 5.25 बजे काम पूरा कर दिया गया।

शानदार काम करने वाली टीम

छह घंटे से कम समय में पुल को तोड़कर दोबारा बनाने में मुख्य इंजीनियर राकेश कुमार, लखनऊ मंडल के सीनियर डीईएन-3 आनंदकृष्ण ओझा, सीनियर डीईएन समन्वय सुधीर कुमार, एईएन पीयूष पाठक, आईओडब्ल्यू विनय कुमार सिंह, नागेंद्र यादव, प्रदीप शुक्ल, एसएसई सौरभ श्रीवास्तव के अलावा 50 से अधिक कर्मचारी रहे।

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  • Web Title:Break the 100 year old shabby rail bridge in Varanasi 5 hours and 55 minutes again