Varanasi News: कुत्ता: खौफजदा बच्चा कह रहा ‘भूरा कुत्ता आ रहा’
Varanasi News: बीएचयू परिसर में पालतू कुत्ते के हमले से घायल बच्चे की सेहत में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी उसे बोलने में दिक्कत आ रही है। उसके पिता का कहना है कि बच्चा अभी भी आघात में है और बार-बार भूरा कुत्ता कह रहा है। मामले में जांच जारी है और बच्चों का इलाज किया जा रहा है।

Varanasi News: वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। बीएचयू परिसर में पालतू कुत्ते के हमले घायल बच्चे की सेहत सुधर रही है। हालांकि अभी बोलने में दिक्कत हो रही है। वहीं बच्चा खौफजदा भी है। उसके पिता प्रेमराम का कहना है कि वह इतने दहशत में है कि बार-बार यही कह रहा है कि भूरा कुत्ता आ रहा है।
पिता का बयान
पिता ने कहा कि मेरे बच्चे को कुत्ते ने ही काटा है। बच्चा इतना डर गया है कि हादसे के 48 घंटे के बाद भी कुछ बोल नहीं पा रहा है। वह अपनी पीड़ा मोबाइल पर टाइप कर रहा है। उसने लिखा है कि कार क्लब और चौराहे के बीच पार्क था। क्लब की आउट रनिंग कर रहा था तभी क्लब से ब्राउन कलर का कुत्ता निकला, तब मैं बचने के लिए कार के पीछे भागने वाला था तभी उसने हमला कर दिया। इसी बीच एक स्कूटी आई। प्रेमा राम ने कहा कि उसके शरीर पर कुत्ते के काटने के निशान हैं। उन्होंने कहा अभी हमारा ध्यान सिर्फ बच्चे के इलाज पर है। भगवान उसे ठीक कर दें। इलाज के बाद अगर जरूरत पड़ी तो कानूनी लड़ाई भी लड़ूंगा। वहीं, ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे की निगरानी कर रही है। हर रोज रिपोर्ट ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज और आला अधिकारियों को दी जा रही है।
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जिले में तीन महीने में लगी 32 हजार एंटी रैबिज डोज
फोटो : कबीर के नाम से
कैप्शन : कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में टीका लगाने के लिए पहुंचे लोग।
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। शहर में कुत्ता, बिल्ली और बंदरों का काफी आतंक है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन महीने में शासकीय अस्पताल में 32,516 डोज एंटी रैबिज इंजेक्शन लगे हैं। इसमें करीब दस हजार नए पीड़ित हैं। सबसे ज्यादा मामले कुत्ते और बंदरों के काटने के आते हैं।
एंटी रैबिज वैक्सीनेशन
कबीरचौरा स्थित मंडलीय, पांडेयपुर स्थित जिला अस्पताल, रामनगर स्थित एलबीएस अस्पताल सहित सभी सीएचसी में एंटी रैबिज वैक्सीन लगती है। मंडलीय और जिला अस्पताल में रोज औसतन सवा सौ डोज एंटी रैबिज इंजेक्शन लगते हैं। वहीं सभी सीएचसी को मिला लिया जाए तो रोज औसतन पांच सौ डोज लगते हैं। मंडलीय और जिला अस्पताल की स्थिति यह कि टीका लगवाने के लिए सुबह से ही कतार लगती है।
शासकीय अस्पतालों में लगे टीके
माह डोज
मई 11264
जून 11325
जुलाई 10223
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सीसीटीवी फुटेज की जांच
हमले के सबूत 36 घंटे बाद भी नहीं खोज सके
परिसर में बच्चे पर विभागाध्यक्ष के पालतू कुत्ते के हमले का मामला
प्रॉक्टोरियल बोर्ड का दावा, सीसीटीवी फुटेज में नहीं दिख रहा कुत्ता
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू परिसर में नर्सिंग स्टाफ के 11 वर्षीय बेटे पर हिंदी विभागाध्यक्ष के पालतू कुत्ते के हमले के 36 घंटे बाद भी सबूत की तलाश जारी है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने कुछ सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं मगर किसी में पालतू कुत्ता नजर नहीं आया है। ट्रॉमा सेंटर के नर्सिंग स्टाफ में यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि मामले की लीपोपोती का प्रयास किया जा रहा है।
ट्रामा सेंटर के नर्सिंग स्टाफ प्रेमा राम के 11 साल के बेटे अभिनव पर गुरुवार की सुबह हिंदी विभागाध्यक्ष के पालतू कुत्ते ने उस वक्त हमला कर दिया जब पिता के कहने पर अभिनव अकेले घर लौट रहा था। कुत्ते ने बच्चे के होंठ, चेहरे और सिर के चारों तरफ नोच लिया और गहरे घाव दिए। नर्सिंग स्टाफ प्रेमाराम ने कुलपति से शिकायत की। प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए बीएचयू प्रशासन ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड को जांच सौंपी मगर आश्चर्यजनक रूप से हमले के 36 घंटे बाद भी घटना से जुड़ा कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं खोजा जा सका है। बच्चे का कहना है कि यूनिवर्सिटी क्लब और चौराहे के बीच कुत्ते ने उसपर हमला किया मगर प्रॉक्टोरियल बोर्ड का दावा है कि अब तक खंगाले गए कई सीसीटीवी फुटेज में कुत्ता नहीं मिला है।
हालांकि प्रभारी चीफ प्रॉक्टर प्रो. फतेबहादुर सिंह ने कहा कि अभी और कैमरे खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक देखी गई फुटेज में बच्चा घर की तरफ जाता हुआ दिख रहा है। इसके बाद वह भागते हुए उसी रास्ते पर लौटा और सड़क पर एक स्कूटी से टकराकर गिर गया। फुटेज में कहीं कुत्ता नहीं दिखा है। कर्मचारियों का आरोप है कि मामले को सड़क दुर्घटना बताने की कोशिश की जा रही है। जबकि बच्चे के चेहरे और सिर पर चारों तरफ चोट है। अगर चोट किसी वाहन के धक्के से गिरकर लगी होती तो चेहरे और सिर का सारा हिस्सा जख्मी नहीं होता।
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पेट पॉलिसी पर सवाल
अधिसूचना भूले न होते तो रोक सकते थे हादसा
जनवरी में बीएचयू ने लागू की थी ‘पेट पॉलिसी’
आठ महीने बाद भी किसी ने नहीं दी जानकारी
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू में 11 साल के बच्चे पर कुत्ते के हमले के बाद जनवरी में परिसर में लागू की गई ‘पेट पॉलिसी’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 22 जनवरी को बीएचयू के एस्टेट विभाग की तरफ से पेट पॉलिसी का सकुर्लर जारी किया गया। मगर इसके बाद दोबारा कोई जांच या पूछताछ नहीं हुई। बीएचयू अधिकारी अधिसूचना जारी कर भूले न होते तो शायद मासूम अभिनव आज अस्पताल में न होता।
बीएचयू की 22 जनवरी को अधिसूचित ‘पेट पॉलिसी’ के अंतर्गत परिसर में रहने वाले सभी कैडर के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने पालतू जानवरों की सूचना देनी थी। उनका ब्योरा प्रदेश सरकार के ‘स्मार्ट काशी एप’ या ‘उपयोग पोर्टल’ पर अपलोड कर हार्डकॉपी एस्टेट विभाग में जमा करनी थी। हालांकि आठ महीने बाद बच्चे पर हमले की घटना के बाद बीएचयू ने फाइलें टटोलनी शुरू कीं तो पता चला कि किसी भी अधिकारी, प्रोफेसर या कर्मचारी की तरफ से अपने पालतुओं का कोई ब्योरा नहीं भेजा गया। कर्मचारियों ने बताया कि टाइप-1 या टाइप-2 आवासों के अलावा परिसर में बने अपार्टमेंट के फ्लैट्स में रह रहे लोग भी अब कुत्ते पालने लगे हैं।
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कुलपति की स्थिति
बच्चे को देखने ट्रॉमा सेंटर कुलपति पहुंचे
वाराणसी। बीएचयू में विभागाध्यक्ष के कुत्ते के हमले में घायल नर्सिंग स्टाफ प्रेमा राम के पुत्र अभिनव को देखने कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी शुक्रवार की शाम ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। कुलपति ने ट्रॉमा सेंटर के आचार्य प्रभारी प्रो. अजीत सिंह और बच्चे का उपचार कर रहे चिकित्सकों से उसके स्वास्थ्य की जानकारी ली। कुलपति ने बच्चे के माता-पिता और परिजनों से मुलाकात भी की। कुलपति ने बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
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कुत्ता : पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराने में पशुप्रेमी उदासीन
फोटो बीएचयू डॉग नगर निगम
नगर निगम की शिथिलता भी कम नहीं जबकि दंड का भी है प्रावधान
पिछले साल आधे अधूरे तरीके से निगम ने चलाई थी पंजीकरण मुहिम
04 सौ 36 कुत्तों-बिल्लियों का कुल पंजीकरण है
30 हजार से अधिक इनकी मौजूदगी का अनुमान
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। कुत्ता या बिल्ली पालने के लिए नगर निगम में पंजीकरण कराना आनिवार्य है। लेकिन इस मामले में शहर के पशुप्रेमी उदासीन हैं। यही कारण है कि नगर निगम के पास पालतू कुत्तों या बिल्ली की आधिकारिक संख्या नहीं है। पशु चिकित्सा विभाग के अनुमान के अनुसार 30 हजार से अधिक पालतू कुत्ते, बिल्ली शहर में हैं। लेकिन नगर निगम में महज 436 का ही पंजीकरण कराया गया है।
नगर निगम पशु प्रेमियों को घर बैठे पालतू पशुओं के पंजीकरण की सुविधा देता है। स्मार्ट काशी ऐप से पंजीकरण कराया जा सकता है। पंजीकरण न कराने पर पशु प्रेमियों पर 500 से 5000 रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। पंजीकरण न कराने पर पहली बार नगर निगम नोटिस भेजता है, एक हफ्ते में पंजीकरण न कराने पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। पालतू कुत्तों और बिल्लियों के पंजीकरण की संख्या कम होने के पीछे नगर निगम की भी लापरवाही है। पिछले साल नगर निगम ने पंजीकरण के लिए घर-घर अभियान शुरू किया था। लेकिन आधे-अधूरे तरीके से यह कार्य किया गया और कुछ दिन बाद इसे बंद कर दिया गया। अब बीएचयू की घटना के बाद नगर निगम प्रशासन ने पंजीकरण के लिए अगले सप्ताह से फिर शिविर लगाने का आश्वासन दिया है।
बीएचयू में पकड़े गये दर्जनभर आवारा कुत्ते
बीएचयू में पालतू कुत्ते द्वारा एक बच्चे को बुरी तरह काटने के मामले में शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों को पकड़ा। दर्जनभर कुत्तों को बीएचयू के विभिन्न जगहों से पकड़ा गया। नगर निगम की ओर से सोमवार से बीएचयू में कुत्तों के टीकाकरण के लिए कैंप भी लगाया जाएगा और पंजीकरण भी कराया जाएगा।


