प्रख्यात शिक्षाविद्, दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. भगवान दास की स्मृति में बीएचयू एक स्वर्ण पदक स्थापित करेगा। यह स्वर्ण पदक विधि संकाय से मानवाधिकार एवं कर्तव्य शिक्षा में एलएलएम करने वाले मेधावी छात्र को दिया जाएगा।
Varanasi News - वाराणसी में बीएचयू ने प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. भगवान दास की स्मृति में स्वर्ण पदक स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह पदक विधि संकाय में मानवाधिकार और कर्तव्य शिक्षा में एलएलएम करने वाले मेधावी छात्रों को दिया जाएगा। डॉ. भगवान दास ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

वाराणसी। प्रख्यात शिक्षाविद्, दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. भगवान दास की स्मृति में बीएचयू एक स्वर्ण पदक स्थापित करेगा। यह स्वर्ण पदक विधि संकाय से मानवाधिकार एवं कर्तव्य शिक्षा में एलएलएम करने वाले मेधावी छात्र को दिया जाएगा। सोमवार को डॉ. भगवान दास के प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन और समीरकांत ने इस स्वर्ण पदक की स्थापना के लिए विश्वविद्यालय को दस लाख रुपये की दानराशि प्रदान की। उन्होंने केंद्रीय कार्यालय में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से भेंट कर धनराशि का चेक सौंपा। डॉ. भगवान दास ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय और एनी बेसेंट के साथ मिलकर भारत की शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि डॉ. भगवान दास की विरासत आज भी सभी को प्रेरित करती है। विश्वविद्यालय परिसर में उनके नाम पर एक छात्रावास भी स्थापित है, जो उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाता है। उन्होंने डॉ. भगवान दास के जीवन और कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का उल्लेख करते हुए काशी विद्यापीठ की स्थापना में उनके योगदान का भी स्मरण किया। कुलपति ने स्वर्ण पदक की स्थापना के लिए परिवार के योगदान का स्वागत किया।डॉ. पुष्कर रंजन और समीरकांत ने डॉ. भगवान दास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए परिवार से जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए। उन्होंने डॉ. भगवान दास की डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे राष्ट्रीय नेताओं के साथ दुर्लभ तस्वीरें भी दिखाईं।
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