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महीने की पहली तारीख को नॉन नेट छात्रों की फेलोशिप मिलेगी

महीने की पहली तारीख को नॉन नेट छात्रों की फेलोशिप मिलेगी

संक्षेप:

Varanasi News - बीएचयू के कुलपति ने नॉन नेट पीएचडी छात्रों के लिए नॉन नेट फेलोशिप को हर महीने की पहली तारीख को देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, ‘नमस्ते बीएचयू ऐप’ में रियल टाइम लोकेशन शेयर करने की नई व्यवस्था भी...

Mon, 18 Aug 2025 04:19 AMNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू के नॉन नेट पीएचडी छात्रों को कुलपति ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर बड़ा तोहफा दिया है। छात्रों को मिलने वाली नॉन नेट फेलोशिप अब हर महीने की पहली तारीख को उनके खाते में पहुंच जाएगी। इसके अलावा बीएचयू परिवार की सुरक्षा के लिए भी ‘नमस्ते बीएचयू ऐप में रियल टाइम लोकेशन शेयर करने की नई व्यवस्था जल्द लागू की जाएगी। कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने ये घोषणाएं की हैं। नॉन नेट फेलोशिप को लेकर अक्सर परेशान रहने वाले शोध छात्रों की समस्या का बीएचयू ने समाधान किया है। प्रस्तावित प्रणाली के अनुसार, जो शोधार्थी उपस्थिति और अन्य शैक्षणिक मानकों को पूरा करेंगे, उनकी फेलोशिप राशि प्रत्येक माह की पहली तारीख को उनके खाते में भेज दी जाएगी।

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इस व्यवस्था के अंतर्गत सभी विभागाध्यक्षों को हर महीने की 25 तारीख तक शोधार्थियों की उपस्थिति सहित अन्य जानकारी वित्त विभाग को देनी होगी। वित्त विभाग इसके बाद फेलोशिप का प्रोसेस बढ़ाएगा और पहली तारीख तक इन्हें खातों में क्रेडिट कर दिया जाएगा। यह अगले महीने से ही लागू कर दिया जाएगा। पहले फेलोशिप जारी होने में कई बार महीनों लग जाता था। सुरक्षा से जुड़ी है दूसरी व्यवस्था दूसरी व्यवस्था बीएचयू परिसर में शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी है। ‘नमस्ते बीएचयू ऐप पर बीएचयू परिवार के सदस्य अब आपात स्थिति में फंसने पर अपनी लाइव लोकेशन भेज सकेंगे। इसके जरिए उन्हें तत्काल मदद पहुंचाई जा सकेगी। कुलपति ने बताया कि इस सेवा का परीक्षण पूरा हो चुका है। यह सुविधा 31 अगस्त से पहले शुरू हो जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों से ‘नमस्ते बीएचयू ऐप का अधिकतम उपयोग करने की अपील की। इसके अलावा कुलपति ने कहा कि ऐसे उत्कृष्ट शिक्षकों को चिह्नित, सम्मानित और पुरस्कृत करने की आवश्यकता है, जिन्होंने अपने शैक्षणिक और शोध कार्यों से विश्वविद्यालय में उल्लेखनीय योगदान दिया है। थीसिस पुरस्कृत करने का सुझाव उन्होंने सुझाव दिया कि पीएचडी शोधार्थियों की उत्कृष्ट थीसिस को दीक्षांत समारोह में पुरस्कृत किया जाए ताकि शोध में और अधिक प्रभावी कार्य को प्रोत्साहन मिले। प्रो. चतुर्वेदी ने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालय जल्द ही कक्षाओं की कमी की समस्या का समाधान निकालेगा, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति सुदृढ़ तरीके से लागू हो सके।