
बीएचयू ने भेजा दर्जनों छात्रों को कारण बताओ नोटिस
Varanasi News - बीएचयू में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में छात्रों ने मार्च और सभा की। छात्रों को 11 फरवरी को जांच समिति के सामने पेश होने का नोटिस मिला है, जिससे वे आक्रोशित हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन ने दमनकारी रवैया अपनाया है। छात्रों ने समानता और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। यूजीसी के नए नियम के विरोध में बीएचयू में शांतिपूर्ण मार्च और सभा करने वाले दर्जनों छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन छात्रों को 11 फरवरी को जांच समिति के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। सोमवार को ई-मेल के जरिए मिली इस नोटिस से छात्रों ने खासा आक्रोश है। यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन-2026 के विरोध में 29 जनवरी को छात्रों ने परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर से पैदल मार्च निकाल कर एमएमवी तिराहे पर सभा की थी। छात्रों ने इस रेगुलेशन पर पुरजोर विरोध किया था। बीएचयू के पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. मृत्युंजय तिवारी की याचिका पर इसी दिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के रेगुलेशन पर स्टे लगा दिया था। सोमवार को इस प्रकरण में डॉ. मृत्युंजय तिवारी, शिवांश सिंह सहित दर्जनों छात्रों को ई-मेल से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के मुताबिक 29 जनवरी को यूजीसी बिल के विरोध में जुलूस में शामिल होने के संबंध में गठित जांच समिति के समक्ष 11 फरवरी को शाम 5 बजे मुख्य आरक्षण अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर इन छात्रों को लिखित बयान दर्ज कराना होगा। इस नोटिस पर छात्रों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर भी बीएचयू प्रशासन अपराध की श्रेणी में रख रहा है और छात्रों के खिलाफ दमनकारी रवैया अपनाया जा रहा है। छात्रनेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि छात्रों में समानता और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा। विदित हो कि यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के प्रोत्साहन के लिए नए नियम जारी किए थे, जिसपर 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया।

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