
लक्षित थेरेपी से होगा मुंह के कैंसर इलाज
Varanasi News - बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के वैज्ञानियों ने मुंह के कैंसर को वर्गीकृत किया है। इससे कैंसर से होने वाली मौतों में कमी आएगी। लक्षित थेरेपी का उपयोग कर मरीजों को साइड इफेक्ट से बचाया जाएगा। प्रो. मनोज पांडेय के नेतृत्व में इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय जर्नल में हुआ है।
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के वैज्ञानियों ने मुंह के कैंसर को वर्गीकृत किया है। इस वर्गीकरण से मुंह के कैंसर से होने वाली मौतों में कमी आएगी। साथ ही मरीज को साइड इफेक्ट से बचाने के लिए पर्सनलाइज्ड (लक्षित) थेरेपी का उपयोग किया जाएगा। इससे सीधे कैंसर की कोशिकाओं को टारगेट कर सकेंगे। इस उपचार में मरीज को कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट से बचाया जा सकेगा। दुनिया भर में इसे एक नई उम्मीद की तरह देखा जा रहा है। इस शोध का प्रकाशन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल म्यूटेशन रिसर्च/रिव्यूज इन म्यूटेशन रिसर्च में हुआ है।
आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय के नेतृत्व में यह शोध किया गया है। प्रो. पांडेय ने कहा कि आठ हजार से अधिक वैज्ञानिक लेखों और जीनोमिक डेटा से इसकी समीक्षा और विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में मुख के कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज हैं। अब तक इलाज के तीन तरीके अभी तक इसके इलाज के लिए तीन तरीके अपनाए जाते हैं। पहला- सर्जरी, दूसरा- कीमोथरेपी और तीसरा- रेडियोथेरेपी। इन प्रक्रियाओं में मरीजों को लंबे समय तक गुजरना पड़ता है। इससे उन पर शारीरिक के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। इसमें मृत्युदर 50 फीसदी के आसपास है। बीमारी के पांच प्रमुख मार्ग डॉ. पांडेय ने कहा कि हम लोगों ने शोध में पाया कि मुख के कैंसर के पांच प्रमुख पाथवे (रास्ता) हैं। इसमें सेल-साइकिल डिसरेगुलेशन (सीसीडी), इम्यून-मीडिएटेड (आईएमए), जेनोबायोटिक मेटाबॉलिज्म-एसोसिएटेड (एक्सएमए), इंफ्लेमेटरी पाथवे एक्टिवेशन (आईपीए) और वायरल प्रोटीन एक्टिवेशन (वीपीए) है। इन पाथवे में 48 जीन के कारण मुंह का कैंसर होता है। नए माध्यम में दो तरीकों से इलाज पारंपरिक उपचार की बजाय लक्षित थेरेपी में दो तरीके से इलाज होगा। इसमें मरीज को दवा दी जाएगी। इसके अलावा एंटीबॉडी भी इंजेक्ट की जाएगी। जिससे मुंह के कैंसर से संबंधित कोशिकाओं को टारगेट कर सकते हैं। ये भी रहे शोध में शामिल इस शोध टीम में प्रो. पांडेय के साथ डॉ. रूही दीक्षित, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. मोनिका राजपूत और डॉ. मृदुला शुक्ला शामिल हैं।

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