प्रो. अजित परिहार को दंत चिकित्सा में मिला पेटेंट
वाराणसी के बीएचयू के प्रो. अजित विक्रम परिहार को ऑर्थोडॉन्टिक बॉंडिंग के लिए एक नई संरचना और तैयारी की विधि के लिए पेटेंट मिला है। यह बायोएक्टिव ग्लास यौगिक दांतों के ब्रैकेट को मजबूती से जोड़ता है और इनेमल को पुनर्निर्मित करता है। यह शोध निकाले गए दांतों पर किया गया है।

वाराणसी। बीएचयू के दंत विज्ञान संकाय के प्रो.अजित विक्रम परिहार को ऑर्थोडॉन्टिक बॉन्डिंग के लिए एक संरचना और उसकी तैयारी की विधि के लिए पेटेंट मिला है। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एवं ऑर्थोडॉन्टिक्स क्षेत्र में उन्हें यह सफलता मिली है। बायोएक्टिव ग्लास यौगिक दांतों के ब्रैकेट को अधिक मजबूती से जोड़ सकता है। उपचार के दौरान इनेमल को पुनर्निर्मित कर सकता है। प्रो.परिहार ने कहा कि वर्तमान में ऑर्थोडॉन्टिक क्लीनिकों में उपयोग किए जाने वाले रेजिन आधारित एडहेसिव के विपरीत यह सामग्री केवल दांत को पकड़कर नहीं रखती। लार में कैल्शियम और फॉस्फेट आयन छोड़ती है और इनेमल की सतह पर एक खनिजयुक्त परत जमा होने की प्रक्रिया शुरू करती है।
यह शोध एक इन-विट्रो पायलट अध्ययन है जो जीवित मरीजों के बजाय निकाले गए दांतों पर किया गया है।
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