Hindi NewsUttar-pradesh NewsVaranasi NewsBHU Introduces Advanced HIPEC Surgery for Cancer Treatment at Reduced Costs
बीएचयू में शुरू होगी हाइपेक सर्जरी, जल्द ठीक होगा कैंसर का ट्यूमर

बीएचयू में शुरू होगी हाइपेक सर्जरी, जल्द ठीक होगा कैंसर का ट्यूमर

संक्षेप:

Varanasi News - इटली से लाई आएगी हाइपैक मशीन, लगभग 1.5 करोड़ रुपये है लागत

Dec 07, 2025 01:42 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
share Share
Follow Us on

वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में जल्द हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (हाईपैक सर्जरी) सर्जरी की सुविधा शुरू होने जा रही है। इस उन्नत तकनीक में सर्जरी के तुरंत बाद पेट के अंदर गर्म कीमोथेरेपी घोल को प्रसारित किया जाता है, जिससे बची हुई कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और बीमारी को जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है। लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लागत वाली यह हाईपैक मशीन इटली से जनवरी में आने वाली है। पेट, बड़ी आंत, अंडाशय और पेट की भीतरी सतह में होने वाले कई कैंसर मामलों में सर्जरी के बाद भी कुछ कैंसर कोशिकाएँ रह जाती हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इन्हें खत्म करने के लिए इलेक्ट्रो कीमोथेरेपी दी जाती है, लेकिन कई बार यह पर्याप्त प्रभावी नहीं होती। ऐसे मामलों में हाईपैक आवश्यक होती है। अभी तक यह सुविधा बीएचयू में उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इसी को देखते हुए विभाग ने मशीन लाने का निर्णय लिया है। विभागाध्यक्ष प्रो. मल्लिका तिवारी ने बताया कि यह एक एडवांस्ड कैंसर ट्रीटमेंट है, जिसमें गर्म कीमोथेरेपी सीधे पेरिटोनियल कैविटी में दी जाती है। यह सामान्य कीमोथेरेपी की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि दवा का असर सीधे ट्यूमर पर पड़ता है और शरीर के अन्य हिस्सों पर दुष्प्रभाव कम होते हैं। 50 फीसदी कम खर्च प्रो. तिवारी ने बताया कि नई मशीन कीमोथेरेपी घोल का तापमान 41–43 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित रखते हुए सर्जरी के दौरान लगातार सर्कुलेशन करती है, जिससे पूरे क्षेत्र में समान प्रभाव पड़ता है और कैंसर के दोबारा होने की संभावना कम होती है। निजी अस्पतालों में जहां एक से दो लाख रुपये तक खर्च आता है, वहीं बीएचयू में यह उपचार लगभग 50% कम लागत पर उपलब्ध होगा। अंग काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी उन्होंने बताया कि आईएलपी तकनीक के माध्यम से हाथ-पैर के ट्यूमर में सिर्फ प्रभावित हिस्से को हाई-डोज कीमोथैरेपी दी जा सकेगी। इससे कई मरीजों में अंग काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और इलाज का असर भी तेजी से दिखेगा।