बीएचयू में एक छत के नीचे दिखा विज्ञान का कल, आज और कल
Varanasi News - बीएचयू का स्वतंत्रता भवन ‘प्रज्ञान 2026’ वार्षिक विज्ञान महोत्सव का गवाह बना, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के 1800 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि एएस किरण कुमार ने बच्चों को विज्ञान के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम में विज्ञान मॉडल, क्विज़ और लाइव साइंस शो का प्रदर्शन किया गया। भारत की अंतरिक्ष तकनीकी में आत्मनिर्भरता पर भी चर्चा हुई।

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू का स्वतंत्रता भवन शुक्रवार को विज्ञान के कल, आज और कल की मौजूदगी का गवाह बना। बीएचयू और आईआईटी बीएचयू की तरफ से आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक विज्ञान महोत्सव ‘प्रज्ञान 2026’ में कक्षा 6 से 12 तक के 1800 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के पद से इसरो के पूर्व प्रमुख पद्मश्री एएस किरण कुमार ने इन बच्चों की वैज्ञानिक सोच को दिशा प्रदान की। ‘मेक इंडिया साइंटिफिक’ पहल के तहत हुए इस आयोजन में वाराणसी और आसपास के जिलों सहित दूरस्थ क्षेत्रों की 100 से ज्यादा स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हुए। उन्होंने नवीन विज्ञान मॉडल, पोस्टर, क्विज़ और प्रायोगिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
आईआईटी-बीएचयू के रोबोटिक्स क्लब और एरो मॉडलिंग क्लब की तरफ से विज्ञान वर्कशॉप और लाइव साइंस शो दिखाए गए। आईआईटी बीएचयू के मुरारी मानव के संयोजन में बीएचयू और आईआईटी के 300 से अधिक छात्र व्यवस्थापन से जुड़े। मुख्य अतिथि पद्मश्री एएस किरण कुमार ने बच्चों को भारत की अंतरिक्ष गतिविधियों की यात्रा, प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री एवं खगोलशास्त्री प्रो. विक्रम साराभाई के दूरदर्शी विचारों और चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी सुनाई।विज्ञान संस्थान के डीन प्रो. आरके श्रीवास्तव ने कहा कि यह विज्ञान महोत्सव वास्तव में बहुत खास है क्योंकि इसमें तीन पीढ़ियों का सहयोग है। कार्यक्रम में प्रो. मधु तापड़िया, डॉ. अवनीश सिंह, प्रो. आरके सिंह, प्रो. अभय कुमार सिंह, प्रो. सुरेंद्र प्रसाद, प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, डॉ. प्रिंस राज, प्रो. अमित कुमार, डॉ. पुरबी सैकिया, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. सुरजीत रक्षित, प्रो. विनोद कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।अंतरिक्ष में तेजी से आत्मनिर्भर हुआ भारतवाराणसी। इसरो के पूर्व प्रमुख पद्मश्री एएस किरण कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीकी में बीते वर्षों में भारत तेजी से आत्मनिर्भर हुआ है। इस प्रगति का असर भारत में मौसम के पूर्वानुमान और कृषि सहित ब्लू इकोनॉमी पर भी पड़ा है।समारोह के बाद खास बातचीत में प्रो. कुमार ने कहा कि पहले वैज्ञानिक अनुसंधान का विषय मानी जाने वाली अंतरिक्ष तकनीकी अब सीधे समाज से जुड़ गई है। आज सैटेलाइट आधारित डेटा के जरिए अधिक सटीक और समय पर पूर्वानुमान संभव है। चक्रवातों की ट्रैकिंग, मानसून की गतिविधि और वर्षा का अनुमान पहले से कहीं अधिक विश्वसनीय हुआ है। मौसम की सटीक जानकारी मिलने से किसान बुवाई, सिंचाई और कटाई का सही समय तय कर पा रहे हैं। इसके अलावा मिट्टी और नमी की स्थिति, फसल के स्वास्थ्य की जानकारी भी सैटेलाइट के जरिए मिलती है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने रिमोट सेंसिंग और अर्थ ऑब्जर्वेशन पर कहा कि इसके जरिए हम पृथ्वी की सतह, जल संसाधन, वन क्षेत्र, खनिज और शहरी विस्तार का अध्ययन कर रहे हैं। कम लागत में बड़े अंतरिक्ष मिशन पूरा करने की भारत की खासियत का श्रेय उन्होंने वैज्ञानिकों की दक्षता और संसाधनों के कुशल उपयोग को दिया। कहा कि अब हमारे मिशन विश्व स्तर पर सराहे जाते हैं।
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