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बीएचयू के विशेषज्ञ बोले, गंभीर बीमारियों का संकेत है फैटी लीवर, केवल बचाव ही है उपाय

फैटी लीवर गंभीर बीमारियों का संकेत है। इसकी कारगर दवा नहीं होने से बचाव ही सही मायने में उपचार है। यह कहना है  सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू) के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के विभागध्यक्ष प्रोफेसर सुनित शुक्ला, प्रोफेसर वीके दीक्षित और डॉ. देवेश यादव का। चिकित्सकद्वय बुधवार को नॉन एल्कोहलिक स्टीटो हेपेटाइटिस दिवस पर जन जागरूकता अभियान के तहत पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। 

चिकित्सकों ने बताया कि गैस्ट्रो की ओपीडी में आने वाले 20 फीसदी मरीज इस समस्या से ग्रसित हैं। गलत खान-पान और कार्यशैली फैटी लीवर के जिम्मेदार हैं। मोटापे और पेट निकलने के साथ शुरू होने वाली इस समस्या से लीवर सिरोसिस व कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। चिकित्सकों ने बताया कि हाल के दिनों में देखा गया कि इस समस्या से वे लोग भी ग्रसित हो रहे है जो शराब का सेवन नहीं करते। उनकी जीवन शैली व खान-पान की विसगतियां इसकी जिम्मेदार है। इसमें ज्यादातर की उम्र 30 से 40 साल है। 

खान-पान में फल, सब्जी तथा अंकुरित अनाज को अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। मधुमेह के रोगियों को भी फैटीलीवर की समस्या होती है। कोल्ड ड्रिंक्स व तला भूना जिसमें ज्यादा वसा होती है से परहेज करना चाहिए। प्रतिदिन 50 मिनट व्यायाम कर पसीना बहाने वाले भी इस बीमारी से बच सकते हैं। सिरोसिस का पता चलने तक लीवर का 90 फीसदी भाग क्षतिग्रस्त हो गया होता है। इसका इलाज लीवर ट्रांसप्लांट से किया जाता है। जो महंगा व जटिल है।   

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  • Web Title:BHU experts say serious fatalities are fatty liver only defense is the solution