आईआईटी और बीएचयू करेंगे अमूर्त विरासतों का संरक्षण
Varanasi News - बीएचयू और आईआईटी बीएचयू ने देश की अमूर्त विरासतों के संरक्षण के लिए एकजुटता दिखाई है। काशी की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के अध्ययन और संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सतत विकास के संदर्भ में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को स्थापित करने का उद्देश्य रखा गया।

वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। बीएचयू और आईआईटी बीएचयू ने देश की अमूर्त विरासतों के संरक्षण के लिए हाथ मिलाया है। इस साझा प्रयास का विशेष फोकस काशी की अमूर्त विरासतों के अध्ययन और संरक्षण पर होगा। शनिवार को आईआईटी बीएचयू में ‘भारत में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर और सतत विकास’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में यह निर्णय लिया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के मानविकी अध्ययन विभाग और सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट सेंटर की तरफ से किया जा रहा है। मानविकी अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. पीके पांडा ने कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (आईसीएच) को आज एक जीवंत ज्ञान-स्रोत के रूप में अधिकाधिक मान्यता मिल रही है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. विनिता चंद्रा ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को सतत विकास, विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में स्थापित करना है। मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक परंपराएं, जिनमें ज्ञान प्रणालियां, हस्तशिल्प, संगीत, अनुष्ठान और मौखिक परंपराएं शामिल हैं, सतत जीवन शैली के गहन संकेत प्रदान करती हैं। उन्होंने घोषणा की कि बीएचयू और आईआईटी मिलकर भारत की सांस्कृतिक धरोहर और विशेष रूप से वाराणसी की विरासत के अध्ययन और संरक्षण को बढ़ावा देंगे।अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. अमित पात्रा कहा कि आईआईटी बीएचयू जैसे तकनीकी संस्थान अब विकास और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी चर्चाओं में मानविकी दृष्टिकोण, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को अधिक गंभीरता से स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मानविकी अध्ययन विभाग स्थित ऐतिहासिक भवन को भविष्य में एक संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है। धन्यवाद ज्ञापन सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट सेंटर के आचार्य प्रभारी प्रो. विकाश कुमार दुबे ने किया। इसके बाद प्लेनरी सत्र में पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने जीआई संरक्षण पर व्याख्यान दिया।
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