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बोले काशी - आवास मिला न शौचालय, पेयजल कहां पाएं

संक्षेप: Varanasi News - वाराणसी के भीटी (रामनगर) के सोनकर चौराहे के पास के निवासी बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। उन्हें आवास, सामुदायिक शौचालय, और स्वच्छ पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग सरकार...

Thu, 16 Oct 2025 05:50 PMNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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बोले काशी -  आवास मिला न शौचालय, पेयजल कहां पाएं

वाराणसी। बुनियादी सुविधाएं अगर दुरुस्त न हों तो नागरिकों के सुख-चैन छिन जाते हैं, जिंदगी बोझ लगने लगती है। रोज का ऐसा दर्द जिसका निदान निवासियों के हाथ में नहीं बल्कि ‘व्यवस्था’ के हाथ में है और ‘व्यवस्था’ यहां मूक जैसी हो गई है। कुछ ऐसा ही बोझिल जीवन भीटी (रामनगर) के सोनकर चौराहे के आसपास रहने वाले लोग जी रहे हैं। यहां के लोगों को न आवास मिला है और न ही सामुदायिक शौचालय बना है,। पेयजल के लिए भटकना पड़ता है, किसी तरह गला ‘तर’ हो पाता है।

तमाम दुश्वारियों के बीच सांस ले रहे सोनकर चौराहा (भीटी-रामनगर) के लोगों ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में अपनी पीड़ा सुनाई, उपलब्ध सुविधाओं की दुर्दशा दिखाई। मुन्ना लाल, राहुल, लक्ष्मीना ने कहा कि यहां के गरीबों के उत्थान के लिए प्रयास नहीं किया जाता। काफी दिनों से समस्याएं झेल रहे हैं, सुनवाई नहीं होती है। कहा कि यहां सीवर लाइन नहीं बिछाई गई है, आसपास सामुदायिक शौचालय भी नहीं है। यहां लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर सामुदायिक शौचालय है, जिसका उपयोग कर पाना यहां के लोगों के लिए कष्टभरा है। किसी तरह से काम चला रहे हैं। अगर सीवर लाइन की सुविधा इस क्षेत्र में मिल जाती तो काफी राहत हो जाती। इस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी लचर है। खाली प्लाटों में जलजमाव बना हुआ है, निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। गनीमत है कि बरसात का मौसम बीत गया है, इसलिए पानी से बचे हैं, लेकिन मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। स्वच्छ पेयजल के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग किसी तरह से पानी का ‘जुगाड़’ कर पाते हैं। यह स्थिति एक दिन की नहीं बल्कि काफी समय से बनी हुई है, लेकिन किसी ने समस्या के समाधान पर ध्यान नहीं दिया।

आवास योजना बनी सपना

सीमा, अनिता, सुनीता ने कहा कि यहां के गरीबों को आवास की सुविधा नहीं मिली है। इस योजना का लाभ भी किसी को नहीं मिला है। किसी तरह से रह रहे हैं। अगर सरकार की आवास की योजना का लाभ हम लोगों को भी मिल जाता तो बहुत राहत हो जाती। अन्य इलाकों में लोगों को आवास योजना का लाभ मिला है, अन्य सुविधाएं भी मिली हुई हैं, लेकिन यहां के प्रति क्यों उदासीनता बरती जा रही है, यह समझ में नहीं आ रहा है। हम लोगों का जीवन किसी तरह से यहां बीत रहा है। बहुत परेशानी होती है। दर्द के साथ जी रहे हैं। हमारी परेशानियों की भी सुनवाई होनी चाहिए। हमें भी सरकार की योजनाओं का लाभ मिलना ही चाहिए।

नहीं बने राशन कार्ड

मुन्नी देवी, चांदनी, पिंटू, अतीक, मुमताज बेगम ने कहा कि यहां के ज्यादातर लोगों के राशन कार्ड नहीं बने हैं। अनेक लोगों ने कार्ड के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन जब भी इसके संबंध में संबंधित से बात की जाती है तो वह तहसील जाने को कहता है। यहां के लोग तहसील की दूरी नापने में खुद को असमर्थ पाते हैं। वहां जाने पर भी सुनवाई नहीं होती है। कहा कि अगर यहीं शिविर लगाकर कार्ड बनाने की व्यवस्था कर दी जाती तो बेहतर होता। हाल यह है कि हमारी समस्याओं के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आता और शिकायतों पर सुनवाई भी नहीं की जाती है। किसी तरह से यहां जीवन यापन कर रहे हैं। समझ में नहीं आता कि किससे अपनी बात कहें कि हमें समाधान मिल जाए। जिनके पास राशन कार्ड किसी तरह से बन गए हैं, उन्हें भी कोटे की दुकान से पूरा राशन नहीं मिल पाता है। इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।

आयुष्मान कार्ड की भी दरकार

जुगड़ा, लक्षन,सरोजा ने कहा कि यहां के लोगों को सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। अगर किसी के भी घर में किसी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो कर्ज लेकर इलाज कराने की नौबत आ जाती है। किसी तरह से इलाज करा पाते हैं। किसी का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। यह कैसे बनता है, किसी को पता भी नहीं है। हालांकि सुन रखा है कि जिनके पास यह कार्ड होता है, गंभीर स्थिति में उसका इलाज हो जाता है। अगर यहां के लोगों को यह सुविधा मिल जाती तो काफी राहत हो जाती। हम भी दूसरों से कर्ज लिए बगैर इलाज करा पाते। बहुत राहत हो जाती।

पेयजल का गंभीर संकट

स्वच्छ पेयजल के लिए यहां के लोग वर्षों से तरह रहे हैं। क्षेत्र में पेयजल की सुविधा नहीं है। पेयजल पाइप लाइन भी नहीं बिछाई गई है। पानी का इंतजाम किसी तरह से लोग कर पाते हैं। आसपास के उन लोगों से पानी मांगना पड़ता है, जिनके पास हैंडपंप है या सबमर्सिबल लगा है। यहां लगा हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा है। अगर उसकी मरम्मत कराने के साथ ही कुछ नए हैंडपंप ही यहां लगवा दिए जाएं तो काफी राहत हो जाएगी। राह चलते लोगों को भी पानी की दिक्कत नहीं होगी। कभी-कभी पानी खरीदकर मंगवाना पड़ता है।

न सफाई, न स्ट्रीट लाइट

निधि, नंदा देवी ने कहा कि इस क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं होती है। सफाईकर्मी कब आते हैं, किसी को पता नहीं है। अभी हाल यह है कि बरसात में मार्ग पर कीचड़ का दर्द झेलना पड़ता है और सू्खे में धूल उड़ती रहती है। मुख्य मार्ग की दशा भी बहुत खराब है, मार्ग क्षतिग्रस्त पड़ा है। मुख्य मार्ग से यहां तक पहुंचने में बहुत परेशानी होती है। इसके साथ ही यहां रात में अंधेरा रहता है। मार्ग पर लगी ज्यादातर स्ट्रीट लाइटे खराब हैं। आसपास के घरों से निकलती रोशनी या वाहनों से आती रोशनी के सहारे ही रात में आवागमन हो पाता है। यहां साफ-सफाई के साथ ही मार्ग पर रोशनी का प्रबंध किया जाना चाहिए। स्ट्रीट लाइटें ठीक करवाई जाएं।

हमारा दर्द सुनें

गरीबों के उत्थान के लिए कोई प्रयास ही नहीं किया जाता। काफी दिनों से समस्याएं झेल रहे हैं, सुनवाई भी नहीं होती है।

मुन्ना लाल

आसपास सामुदायिक शौचालय नहीं है। लगभग डेढ़ किमी दूर सामुदायिक शौचालय है, जिसका उपयोग कर पाना यहां के लोगों के लिए कष्टभरा है।

राहुल

सीवर सुविधा मिल जाती तो काफी राहत हो जाती। इस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था लचर है। खाली प्लाटों में जलजमाव बना हुआ है।

लक्ष्मीना

आवास सुविधा नहीं मिली। अगर आवास योजना का लाभ हम लोगों को भी मिल जाता तो हमें बहुत ही राहत हो जाती।

सीमा देवी

अन्य इलाकों में लोगों आवास सुविधा मिली हुई हैं, लेकिन यहां के प्रति क्यो उदासीनता है, यह समझ में नहीं आता है।

अनिता

हमारी परेशानियों की भी सुनवाई की जानी चाहिए। हम लोगों को भी सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ मिलना ही चाहिए।

सुनीता

ज्यादातर लोगों के राशन कार्ड नहीं बने हैं। अनेक लोगों ने आवेदन कर रखा है, लेकिन आज तक उसका निस्तारण नहीं हुआ।

मुन्नी देवी

तहसील तक की दूरी नापने में असमर्थ हैं। शिविर लगाकर यहां राशन कार्ड बनाने की व्यवस्था कर दी जाती तो बेहतर होता।

चांदनी

समस्या समाधान के लिए कोई आगे नहीं आता। शिकायतों पर सुनवाई भी नहीं होती। किसी तरह से यहां जीवन यापन कर रहे हैं।

पिंटू

किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। अगर घर में किसी की तबीयत खराब हो गई तो कर्ज लेने की नौबत आ जाती है।

जुगड़ा

क्षेत्र में पेयजल की सुविधा नहीं है। पेयजल पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। पानी का इंतजाम किसी तरह से हो पाता है।

लक्षन

रात में अंधेरा रहता है। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी है। रात के समय आवागमन करने में भय लगता है। लाइटें ठीक की जाएं।

सरोजा

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सुझाव और शिकायतें

खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों की शीघ्र मरम्मत कराई जानी चाहिए ताकि रात में आवागमन करने में भय न लगे। सुरक्षा भी रहे।

गरीबों के राशन कार्ड बनाने के लिए गंभीरता से पहल करने की जरूरत है, ताकि इस समस्या का समाधान लोगों को जाए।

स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए शीघ्र कदम उठाने की जरूरत है। पेयजल पाइप लाइन बिछाई जानी चाहिए, इससे राहत होगी।

आवास योजना का लाभ लोगों को मिलना चाहिए। यहां शिविर लगाकर समस्याओं पर सुनवाई हो और मौके पर निस्तारण किया जाए।

सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाना चाहिए, इससे लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी और कोई दिक्कत नहीं होगी।

शिकायतें

मार्ग पर लगीं स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी है। रात के समय आवागमन करने में भय लगता है। लाइटें ठीक नहीं की जा रही हैं।

ज्यादातर लोगों के राशन कार्ड नहीं बने हैं। अनेक लोगों ने आवेदन कर रखा है, लेकिन आज तक उसका निस्तारण नहीं हुआ।

क्षेत्र में पेयजल की सुविधा नहीं है। पेयजल पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। पानी का इंतजाम किसी तरह से हो पाता है।

आवास सुविधा नहीं मिली। आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए यहां कभी शिविर नहीं लगाया है। सुनवाई भी नहीं होती।

पास में सामुदायिक शौचालय नहीं है। डेढ़ किमी दूर सामुदायिक शौचालय है। उसका उपयोग कर पाना यहां के लोगों के लिए कष्टभरा है।