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28 फरवरी, 2020|12:57|IST

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कागजी कार्रवाई पूरी फिर भी ऋण नहीं दे रहे बैंक

नम्रता अग्रवाल

सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची से ट्रिपल ए श्रेणी में बीकॉम करने के बाद नम्रता अग्रवाल ने अपने पुश्तैनी उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए स्टार्टअप की सोची। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत नम्रता ने 23 मई 2017 को ऑनलाइन आवेदन किया। 15 दिन में इंटरव्यू हो गया और पैनल ने उनका प्रपोजल स्वीकर भी कर लिया। बैंक में उन्होंने 25 लाख रुपये ऋण का आवेदन किया है, जिसके लिए चार माह से चक्कर लगा रही हैं। 

यह अकेला उदाहरण नहीं है जब उद्योग शुरू करने के लिए उद्यमियों को विभागों और बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हों। उद्यमी को कभी यूपीएसआईडीसी तो कभी उद्योग विभाग के अधिकारियों के यहां ऑनलाइन आवेदन के बावजूद परेशान होना पड़ रहा है। केंद्र व प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये नई उद्योग नीति लेकर आई, सिंगल विंडो सिस्टम की बात कही। लेकिन सच्चाई यह कि न तो उद्यमियों को सिंगल विंडो सिस्टम का लाभ मिल रहा है और छोटी-छोटी मंजूरी के लिए लखनऊ-कानपुर के चक्कर काटने पड़ते हैं, सो अलग। नम्रता के पिता प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि हमारा तीन पीढ़ी से पंखे का काम है फिर भी बैंक अधिकारी लोन देने में आनाकानी कर रहे हैं। बैंक अधिकारी बेटी से पूछते हैं कि शादी हो जायेगी तो कैसे ऋण का भुगतान करेंगी। इस तरह के सवालों से युवा उद्यमी हतोत्साहित होते हैं। ऐसा तब है जबकि योजना में बैंक को कोलेट्रल सिक्योरिटी केंद्र सरकार दे रही है। यदि बैंक ने अभी लोन नहीं दिया तो प्रोजेक्ट टालना पड़ेगा। 20 से ज्यादा लोगों का रोजगार भी छिनेगा। 

रामनगर फेज दो में सोलर पैनल प्लांट लगाने की योजना बना रहे प्रशांत गुप्ता ने कहा कि स्टार्टअप योजना में आवेदन किया था। पूर्वांचल में मेरा पहला प्रोजेक्ट है लेकिन नया आइडिया न होने के कारण कैसिंल हो गया। अब मुझे पहली बार उद्योग लगाने के लिये स्टार्टअप योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार को उद्योग को बढ़ावा देने के लिये कुछ बुनियादी सुधार करने चाहिये। 

नयी उद्योग नीति में कुछ नया नहीं है। सिंगल विंडो सिस्टम की बात तो होती है लेकिन यह अभी तक संभव नहीं हुआ है। अब भी उद्यमियों को पर्यावरण विभाग की मंजूरी के लिए लखनऊ और यूपीएसआडीसी में नक्शे व वित्तीय अधिकार के लिए कानपुर से मंजूरी का इंतजार करना होता है। 
राजेश भाटिया, अध्यक्ष- इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन वाराणसी चैप्टर 

ऐसे उद्यमियों की लंबी कतार है जो कुछ नया करना चाहते हैं लेकिन सिस्टम की खामी के कारण वे निराश होते हैं। 
देव भट्टाचार्य, अध्यक्ष-रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन