VIDEO- 71 की उम्र में तीजन बाई ने दिखाया 17 का उत्साह
पंडवानी गायिका तीजन बाई बेशक 71 वर्ष की हो चुकी हैं मगर उनकी गायकी में जोश और उत्साह अब भी 17 साल के युवा जैसा है। शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पंडवानी गायन के प्रस्तुतीकरण के बाद अस्सी घाट...

पंडवानी गायिका तीजन बाई बेशक 71 वर्ष की हो चुकी हैं मगर उनकी गायकी में जोश और उत्साह अब भी 17 साल के युवा जैसा है। शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पंडवानी गायन के प्रस्तुतीकरण के बाद अस्सी घाट पर जब उन्होंने गायन की शुरुआत की तो थकान साफ दिख रही थी। गले से खुलकर नमस्कार भी साफ साफ नहीं निकला था मगर जैसे-जैसे महाभारत में जुए का प्रकरण आगे बढ़ता गया, कथानक में भावनात्मकता बढ़ती गई, वैसे वैसे तीजन बाई का गला भी खुलता गया। द्रोपदी चीरहरण की कहानी सुनाते सुनाते वक्त तीजन बाई का गायन अपने चरम पर था।
उन्होंने स्पिक मैके और पर्यटन विभाग की ओर से अतुल्य भारत संगीत श्रृंखला के अंतर्गत दूसरे चरण की शुरुआत की। अस्सी घाट पर तीजन बाई ने अपने ओजपूर्ण गायन से महाभारत के विविध प्रसंगों को जीवंत किया। उन्होंने कौरवों और पांडवों की द्युत क्रीड़ा का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया। उन्होंने गायन के साथ अभिनय और वार्ता की शैली मिलाकर नई प्रखरता प्रस्तुत की। इससे पूर्व तीजन बाई ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के वार्षिक उत्सव के समापन समारोह में करीब डेढ़ घंटे तक पंडवानी का प्रस्तुतीकरण किया था। स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में सहभागिता करने के बाद तीजनबाई सीधे अस्सी घाट पहुंचीं।
पंडवानी गायन के बाद उज्जैन के प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने विशेष अंदाज में कबीर को याद किया। गुरु वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत करने के उपरांत कबीर के कई प्रसिद्ध पद गाए। पारंपरिक वाद्य यंत्र लेकर बैठी अपनी टोली के साथ वह डेढ़ घंटे से अधिक समय तक काशी वासियों को कबीर वाणी का श्रवण कराते रहे। उन्होंने अपनी पसंदीदा रचना जरा हल्के गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले की प्रस्तुति से श्रोताओं को विभोर कर दिया। यह भजन टिपानिया के हृदय के बहुत करीब है। कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने यह कहा कि काशी में कबीर के पदों का गायन मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।


