
आदिवासी अध्येता मयंक मुरारी को विद्याश्री सम्मान
Varanasi News - वाराणसी में पं.विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में विद्याश्री न्यास द्वारा वार्षिक सम्मान-2026 की घोषणा की गई। इस वर्ष का सम्मान झारखंड के संस्कृति चिंतक डॉ. मयंक मुरारी को उनकी कृति ‘जंबूद्वीपे भरतखंडे’ के लिए दिया जाएगा। पुरस्कार 13 से 15 जनवरी को भारतीय लेखक-शिविर में प्रदान किए जाएंगे।
वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पं.विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में स्थापित विद्याश्री न्यास की ओर से दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान-2026 की घोषणा शुक्रवार को की गई। इस वर्ष का विद्याश्री सम्मान आदिवासी जीवन के अध्येता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले झारखंड के संस्कृति चिंतक एवं कवि डॉ. मयंक मुरारी को दिया जाएगा। न्यास की ओर से अन्य श्रेणियों में भी अलग-अलग सम्मान के लिए चयनित लोगों के नाम जारी किए गए हैं। ये सम्मान पं.विद्यानिवास मिश्र की जयंती पर 13 से 15 जनवरी तक होने वाले भारतीय लेखक-शिविर के दौरान प्रदान किए जाएंगे। डॉ. मयंक मुरारी को यह सम्मान उनकी कृति ‘जंबूद्वीपे भरतखंडे’ के लिए दिया जाएगा।
‘भारत : एक सनातन राष्ट्र’, ‘झारखंड के अनजाने खेल’, ‘झारखंड की लोककथाएं’, ‘लोकजीवन : पहचान, परंपरा और प्रतिमान’, ‘पुरुषोत्तम की पदयात्रा’, ‘अच्छाई की खोज’ आदि कृतियां उनकी ख्याति का आधार हैं। उनके साहित्यिक योगदान के लिए झारखंड विधानसभा सम्मान, शब्द-शिल्पी सम्मान, तुलसी सम्मान, झारखंड गौरव सम्मान, जयशंकर प्रसाद स्मृति सम्मान, साहित्य अकादमी कथेतर सम्मान प्राप्त हो चुका है। इस वर्ष का लोक कवि सम्मान काशी के डॉ. जयप्रकाश मिश्र को दिया जाएगा। उनके 11 खंडकाव्य प्रकाशित हैं। आदिवासियों के जीवन और साहित्य से संबंधित उनकी 8 कृतियां विशेष रूप से चर्चित हुई हैं। लोकगीत गायन के लिए मिर्जापुर की कलाकार संतोष श्रीवास्तव को इस वर्ष का ‘राधिका देवी लोककला सम्मान’ किया जाएगा। पं.श्रीकृष्ण तिवारी स्मृति गीतकार सम्मान के लिए लखनऊ की कवयित्री-कथाकार डॉ. अमिता दुबे को चुना गया है।‘आचार्य विद्यानिवास मिश्र पत्रकारिता सम्मान’ काशी के वरिष्ठ पत्रकार डॉ.अत्रि भारद्वाज को मिलेगा। ‘साहित्य-मनीषी अरुणेश नीरन स्मृति भोजपुरी वैभव सम्मान’ कथाकार-आलोचक-चिंतक प्रो. रामदेव शुक्ल को प्रदान किया जाएगा। न्यास के सचिव दयानिधि मिश्र ने बताया कि पं. विद्यानिवास मिश्र जन्मशती के समापन-समारोह में काशी के साहित्य और कलाजगत की कुछ अन्य विभूतियों को भी सम्मानित करने का निर्णय किया गया है। इनमें कवयित्री-कथाकार डॉ. मुक्ता, चित्रकार डॉ.सुनील कुमार विश्वकर्मा, छायाकार मनीष खत्री, कवि ब्रजेंद्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश’ और कवींद्र नारायण श्रीवास्तव, मूर्तिशिल्पी ज्ञानेश्वरनाथ शर्मा और भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार में अहर्निश समर्पित कंचन सिंह ‘परिहार’ शामिल हैं।

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